वाह बेटा मौज करदी
नमस्कार दोस्तों आज हम लेकर आये है अपनी बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था की हालत पर अपनी काव्य रचना wah beta moj kardi इस कविता में वर्तमान सरकार द्वारा बच्चों को प्रोमोट की जो प्रणाली अपनाई गयी है उसके बहुत बड़े सामाजिक नुकसान की ओर इंगित किंया गया है। घरों में कैद करने से किसी भी समस्या का कोई हल नहीं निकल सकता है। आज जिन बच्चों को लगातार दूसरे वर्ष भी प्रोमोट कर दिया गया है वो अब जीवन में उन चीजों को सिखने से वंचित हो गए है जिनके वो हकदार थे इसकी बजाय उनमें सोशल मीडिया की एक बहुत बड़ी लत पड़ गयी है। सच तो यह है कि सरकार ने बच्चों के भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ किया है।
वाह बेटा मौज करदी
भोमली, सोनकी भूलगी क, को, बारहखड़ी
घिसली थापे बैठी अब थेपड़ी
आ रंडार कोरोना चोखी गेल पड़ी
घरा बैठ्या ठाला की खड़ी फ़ौज करदी
वाह बेटा मौज करदी।
बाबूड़ों पब्बजी को लेवल पर लेवल तोड़ रयो
भुगानो काको टाबरिया का धो रियो गाबा
अब किंया चालसी बापू आरा ढाबा
आ चोखी सरकार नई शिक्षा नीति की खोज करदी
वाह बेटा मौज करदी।
यु ट्यूब पर अब नहीं देख्योडो वीडियो बच्यो न एक
प्रधान जी ए ही हाल रिया तो
टाबरिया सगळा होज्या गा अंगूठा टेक
बिना परीक्षा ही आगली क्लास मांय
मनोज कै सरोज कर दी
वाह बेटा मौज करदी।
धूड़ीयो, मिण्यो करा ली चिकणी भोढ़ी
लसनिया मिर्च फेर खावण लागगी सिलदर अर लोढ़ी
बस्तों कर दियो खाली
टाबरिया री बिन पढ़ाई री फीस
घरका पर बोझ करदी
वाह बेटा मौज करदी।
थारो आपणो कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


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