अरे जादूगर आ किसी करी तैयारी
नमस्कार दोस्तों आज की मेरी रचना Aa Kisi Kri Teyari आज के मुश्किल समय में सरकार की कोरोना महामारी को लेकर तैयारियों पर व्यंग्य है। इस कविता में मुझे कुछ कटु शब्दों का प्रयोग करना पड़ा है। लेकिन जिस तरह से हम सबने अपने प्रियजनों को खोया है तो इतना गुस्सा बनना वाजिब है। अगर समय रहते हमारी सरकारें उचित कदम उठाती तो हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता। इन परिस्थितियों ने सरकार की पूरी पोल खोल दी है। अब सब समझ गए है की इन नेताओं पर विश्वास कर अपनी खुद की जान गवानी है।
अरे जादूगर आ किसी करी तैयारी
ऊपर तपै तावड़ों
नीचै पैरा मं जंजीर
काकोसा ! किंया रान्धस्यो थे खीचड़ो
धोळी दाढ़ी आरो बाबो टेढ़ी खीर।
ज्येठ रै महीने मांय घणी पिओ राबड़ी
दुख बांटे न कोई, सुख मं सगळा को सीर
नित दिन मौसम बदले डाबड़ी
धोळी दाढ़ी आरो बाबो टेढ़ी खीर।
माड़ो टैम आग्यो मिनखा रौ
लाश उड़िके बारी
काळ खड्यो चौबारे ऊपर
अरे जादूगर आ किसी करी तैयारी।
गिणती होणी ही मिनखा री ई बरष
लाशें गयी कफ़न को तरस
अर्थी उठी मेरे यार की
पर कंधा था सरकारी
अरे जादूगर आ किसी करी तैयारी।
कोरोना काकी धींगाणो कर लियो
ताऊ ते के लेर यास
दो बगत री रोटी
गरीब रै गळे री फांस
फीकी पड़गी सगळी दुकानदारी
अरे जादूगर आ किसी करी तैयारी।
चुकली काकी टीको उड़िके
बिमला मामी गंगा री धार
जीतू भायौ रेवड़ चरावै
इब कांई करस्या
ई नाम की चढरी सगळा के बुखार
धरी की धरी रैगी सगळी होशियारी
अरे जादूगर आ किसी करी तैयारी।
थारो आपणो कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


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