फुटगी तकदीर
नमस्कार आज की हमारी रचना Futagi Takdir केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विद्यार्थियों को प्रोमोट करने से होने वाले विनाश को व्यंग्य के रूप में व्यक्त करती है। हमारे राजनेताओं ने बिना कुछ सोचें समझे विद्यार्थियों को बार बार प्रोमोट करने की जो निति बना ली है वो विद्यार्थियों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। सरकार बार बार फॉर्म फीस के नाम पर बड़ी राशि इकट्ठी कर रही है लेकिन परीक्षा नहीं हो रही है। बीमारी की आड़ में अपनी कोठी को भरा जा रहा है। कोई पूछने वाला नहीं है कि क्या विद्यार्थियों के मूल्यांकन का कोई तरीका नहीं है। क्या ये जो बिन बात के पैसे इकट्ठे किये गए उन्हें जब परीक्षा ही नहीं हुई तो विद्यार्थियों को लौटाए और शिक्षा नहीं तो फिर शिक्षा मंत्री का क्या काम उन्हें हटाए।
फुटगी तकदीर
बिन पढ़या अर बिन परीक्षा कै
टाबर पास होग्या,
वाह सा मोदी जी घणा चोखा
देश रा विकास होग्या।
बिन पढ़ाई अर लिखाई
घणी फीस चुकाई,
नित नवा फार्म भर-भर
थारे मुंडे आगे
रिपया का कर दिया कुड्डा।
ऐ ही हाल रिया तो
सगळा कुँवारा बिन ब्याया ही
हो ज्यासी बुढ़ा।।
आ थारी विकास री रेल न रोको
अब पौत सगळा चौड़े आग्या है
बिच्यारो साधे बुधे मिनख न टोको
अर अमीरा न दयौ थे मौको।।
न कोई परीक्षा, न कोई पढ़ाई
कांई बात री फीस चुकाई
गहलोत जी जद शिक्षा ही कोनी
तो शिक्षा मंत्री रो पद क्यूँ
किंया पाळ राख्या हो थे इता कुत्ता
जकै शिक्षा मंत्री न बोलणे रो होस कोनी
बिकै जल्द ही पड़सी जूता
घणी मौज मनाई थे जाड़े मं
जनता सब जाणें
कुण कुण गयौ नाथी के बाड़े मं।।
जका मंत्री रोज क्लासा मांय
च्यार आखर सीखणे खातिर
गुरुजी की खाई घणी मार।
बे ही बोल सकें है
"शिक्षा मांय शिक्षक को कै है किरदार"
ओ राजस्थान है प्रधान
अठै आवै कै आँधी, कै सूंटा
5 साल बाद उपड़ ज्या है
बड़ा बड़ा बूंटा।
किता ही कस्टा करलयो थे खूंटा।
मास्टरां की थे मंत्री जी
घणी उड़ाली खिली
मास्टरां रै घरा खाणे रा
कर दिया थे टोटा
मास्टरां रा टाबर घाले थारी बार
शिक्षक समाज नै बणावै
दुखड़े रा दिन रैगया अब च्यार
अब तू खैर मना गूंगी-बहरी सरकार।
आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


Please do not enter any spam link in the comment box.