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व्यक्तिगत परिचय 


नमस्कार दोस्तों !!!
मैं  प्रमोद कुमार सैनीकवि (हिंदी, राजस्थानी), 
स्कूल एवं कॉलेज व्याख्याता (अंग्रेजी साहित्य)।
नाम: प्रमोद कुमार सैनी
पिता का नाम: लादुराम सैनी
माता का नाम: सावित्री देवी
पत्नी: परमात्मा देवी
पुत्र: अंगद बालाण

जन्म: 23 अक्टूबर 1983
पता: आनंदपुरा मोहल्ला, वार्ड नंबर 01, 
पोस्ट: मण्डावा, जिला: झुंझुनूं, राज्य: राजस्थान (भारत)
मोबाइल नंबर: 9950915585
व्हाट्सअप: 9950915585
ईमेल : pk.balan10@gmail.com

ब्लॉग के बारें में 

दोस्तों हमारा यह ब्लॉग Poetryfort.com मेरे स्वयं द्वारा रचित मूल काव्य रचनाओं पर आधारित है। इसमें हम शेर, शायरी, गीत, गज़ल, नज़्म आदि को आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगे।  इस ब्लॉग  Poetryfort.com में आप केवल और केवल मेरी मौलिक रचनाओं को पढ़ सकते है। मैं भिन्न भिन्न विषयों पर अपनी रचनाएँ हिंदी एवं राजस्थानी भाषा में  लिखता रहता हूँ। मेरी रचनाये अक्सर निम्न विषयों पर आधारित होती है-
१. ज़िंदगी 
२. शौर्य 
३. विरह 
४. प्रेम 
५. श्रृंगार 
६. प्रेरणा 
७. देश प्रेम 
८. मंज़िल 
९. धर्म 
१०. कर्म 
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मुझे मेरे प्रशंसकों द्वारा दिए गए विषयों पर भी रचना करना बहुत पसंद है।  जब कभी भी मुझे मेरे किसी प्रशंसक द्वारा कोई विषय रचना हेतु मिला है तो मुझे उस विषय पर रचना कर बहुत ही गौरवान्वित महसूस हुआ है। 

हमारे इस ब्लॉग की स्थापना : 2 अप्रैल 2020 


हमारे इस ब्लॉग का मकसद 

हमारे इस ब्लॉग  Poetryfort.com का मकसद है उन साहित्य प्रेमियों की साहित्यिक जिज्ञासा को शांत करना जिनके लिए बहुत बड़े नामी गिरामी कवियों  और लेखकों की रचनाओं को पढ़ना बहुत मुश्किल है क्योंकि उनकी साहित्यिक रचनाओं को खरीद पाना उनके लिए आसान नहीं होता है। जबकि आजकल मोबाइल और कंप्यूटर प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच में हो चुके है। हमारा यह ब्लॉग देश विदेश के उन नए उभरते कवियों और लेखकों के लिए एक प्रेरणादायक स्रोत होगा। 

हमारे ब्लॉग का लक्ष्य 

हमारे इस ब्लॉग  Poetryfort.com का लक्ष्य देश-विदेश के सभी उम्र के काव्य प्रेमियों तक पहुँचना है। हम चाहते है कि काव्य प्रेमी चाहे वो किसी भी धर्म , जाति , देश और प्रान्त का क्यों नहीं हो उस तक हम हमारे जज़्बात पहुँचाये साथ ही साथ उनकी भावनाओं तक पहुँचकर उनका हमारे काव्य में समावेश करें। इंटरनेट आज के समय का एक श्रेष्ठ साधन है उसके माध्यम से हमने ये हमारे और आपके संयोजन का संकल्प लिया है।  इसके माध्यम से हम साहित्यिक समावेश के एक नए युग का आरम्भ करने जा रहे है। 


काव्य जीवन की शुरुआत 

मैं बचपन से ही मृदु स्वभावी हूँ।  अपने चार भाई-बहिनों में सबसे छोटा होने के कारण मुझे कभी भी घर-परिवार में सहजता से अपनी बात रखने का कभी भी मौका नहीं मिला। इसके कारण से हमेशा मन में एक कशिश सी रह जाती थी। धीरे - धीरे इन विचारों को व्यक्त करने का मौका मिल गया जब मेरी उम्र महज १२ वर्ष थी और मैं 9 वीं कक्षा में था। तब तक मुझे नहीं पता था कि  मेरे अंदर लेखन के अच्छे गुण थे। हिंदी विषय के अंदर निबंध लेखन और काव्य छंद की सप्रसंग व्याख्या  मेरा पसंदीदा लेखन कार्य था लेकिन मैं इससे अनजान था। एक बार हमारे हिंदी विषय के आदरणीय गुरुदेव श्रीमान बिशनसिह ने जब पूरी कक्षा के सामने मेरे लेखन को पढ़कर सुनाया तो मन में एक छोटी सी लेखन प्रेरणा ने जन्म लिया।  उसी वर्ष जिले की किसी संस्था द्वारा सम्पूर्ण जिले के विद्यालयों में तात्कालिक निबंध लेखन का आयोजन किया गया।  जिसमें तुरंत विषय देकर निबंध लेखन करवाया जाता है।  इसलिए हमारे विद्यालय में भी इसका आयोजन करने हेतु उक्त संस्था का दल आया।  श्रीमान बिशनसिंह ने अपने गुरु कौशल से संस्था के होनहार विद्यार्थियों को इस हेतु चुना गया।  जिनमे मैं  भी एक था।  हमें विषय दिया गया कश्मीर में आतंकवाद।  मैंने अपने श्रेष्ठ बुद्धि कौशल को काम लिया जो अब तक मैंने अपने गुरुजनों और साहित्यिक पाठ्य प्रवर्ति से सीखा था। साथ ही साथ मैंने अपने व्यक्तिगत विचारों और स्वयं द्वारा रचित काव्य चौपाइयों का समावेश किया। इस निबंध लेखन प्रतियोगिता के बाद पुरे विद्यालय में कोई भी विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में जीत के लिए आशावान नहीं था। बल्कि सबके लिए ऐसी प्रतियोगिता एक हास्य का विषय बन गई। इसके बाद धीरे -धीरे  सब इसके बारे में भूल गये। 
        इस प्रतियोगिता के एक माह बाद एक दिन विद्यालय में सभी को सभागार में उपस्थित होने के लिए बोला गया। इस कार्यक्रम में हमे बताया गया कि पिछले वर्ष जो निबंध प्रतियोगिता हुई थी उस में हमारे विद्यालय से भी एक विद्यार्थी के निबंध को भी जिला स्तर पर श्रेष्ठ दस रचनाओं में चुना गया है।  सबके साथ साथ मैं स्वयं हतप्रभ था कि वह कौन हो सकता है ? पर जब मेरा स्वयं का नाम लिया गया तो मुझे बहुत ही गौरवान्वित महसूस हुआ।  उस समय मंच पर मेरे आदर्श गुरुदेव श्रीमान बिशनसिंह द्वारा मेरी प्रशंसा में जो शब्द कहे गए उन शब्दों ने मुझे और आगे लिखने के लिए प्रेरित किया।
        उसके बाद मैंने दिल्ली प्रेस प्रकाशन के बारे में पुस्तकालय में एक पुस्तक में पढ़ा , जो कि  मेरे जैसे लोगो को मौका देता है।  मैंने उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी इकट्ठी की और सबसे पहले मेरी पांच रचनाओं को मैंने उन्हें भेजा। मेरे लिए ख़ुशी की बात थी की दिल्ली प्रेस प्रकाशन ने मेरी उन पांच कविताओं में से एक कविता को प्रकाशित करने के लिए चुन लिया था। जिस कविता का शीर्षक है जीवन - क्रम। आप भी मेरी इस कविता को निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर इसे पढ़ सकते है-


मेरी और भी श्रेष्ठ रचनाओं को आप हमारे ब्लॉग के जरिये पढ़ सकते है -
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इसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और समय-समय पर मेरी रचनाये विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है।  अब इसी क्रम में हमने ब्लॉग को चुना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो तक अपनी रचनाओं को पहुंचाया जा सके। आप सब लोगो के आग्रह के बाद ही हमने अपना एक ब्लॉग बनाने की सोची है।  आशा है कि इस ब्लॉग  Poetryfort.com के सहारे आप और हमारे बिच और भी मधुर सम्बन्ध बन पाएंगे। 
धन्यवाद। 

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