टैम बदळगी

Pramod Kumar Saini
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टैम बदळगी

नमस्कार हमारी यह रचना Taim Badalgi ( टैम बदळगी) समय के साथ हमारे समाज , संस्कृति, रहन-सहन, खानपान, और व्रत-त्योहारों में आये परिवर्तन को दर्शाती है।

Taim Badalgi

टैम बदळगी

टैम बदळगी
फळसो रैयो न पोळी
इं मरजाणे मोबाइल
मं घुसगी सगळी टाबर अर टोळी।

टैम बदळगी
खाणे मं होग्या कैर-सांगरी रा टोटा
अब कठै रिया है पीतळ आरा लोटा।

टैम बदळगी
मुछ रैयी न रैया मुच्छया रा बळोटा
नर और नार रो फरक रियो कोनी
रांड घटा मिनखां मं मर्दा रा टोटा।

टैम बदळगी
पगड़ी रैयी न पागड़ी
खेतां मांय भरुण्ट उगगो
दुचाबड़ी रा होग्या टोटा।

टैम बदळगी
छान रैयी न झुंपा
काजळ बच्यो न काजळ आरा कुम्पा।

टैम बदळगी
धोती रैयी न कुर्तों
अब कुण पकावे बैगन आरो भुरतो।

टैम बदळगी
चिलम रैयी न हुक्के री फ़टकार
इब एक सागे न बैठ सके मिनख च्यार।

टैम बदळगी
खुड्डी रैयी न ढाळयो
बन्द कोठी आरा कै जाणें माळयो।

Taim Badalgi

टैम बदळगी
कुर्ती रैयी न कांचळी
मिर्च घणी लागै जद सामे आवै बात साँचली।

टैम बदळगी
झाँटी रैयी न झांटो
इब घर मं सुहावै न कांटों

टैम बदळगी
लूगड़ी रैयी न तागड़ी
खाली पड़ी कुणा टोवै छाबड़ी

टैम बदळगी
कुवों रैयो न बावड़ी
धरती मायड़ री सांस फुलगी
माड़ी आई अबकळे ज्येठ-साड़ री तावड़ी।

टैम बदळगी
खेत रिया न खलियान
मिनख, मिनख रो दुसमण
कै जाणें मान अर सम्मान।

टैम बदळगी
पीपळ रैयो न गट्टों
जुबान री कीमत घटगी
घट-घट मतलब रो सट्टो।

टैम बदळगी
सासु रैयी न सासु आरो ठरको
कढ़ावणया खाली पड़ी
क्याके देवै अब झबरको।

टैम बदळगी
साँच रैयी न सबर
जहर घुळ रियो गुहाड़ा मं
भाई, भाई री खोद रियो कबर।

थारो आपणो कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

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