नमन है जननायक को
नमस्कार आज की मेरी रचना Naman Hai Jannayak Ko लोकनायक स्वर्गीय मेघराज जी पँवार पूर्व विधायक (चूरू) की 35 वीं पुण्यतिथि पर उनके श्री चरणों में भेंट है। आपकी सादगी, ईमानदारी की मिशाल चूरू जिले के जन-जन की जुबान पर आज भी है। आपके द्वारा किसान हितों के लिए किये गए कार्य और जिले के विकास के लिए आपकी समर्पण भावना राजनैतिक काल खंड में आपके अहम योगदान को हमेशा याद करवाती रहेगी। अगर आपको चूरू का गाँधी कहे तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

निर्बल का सहारा
नमन है जननायक को
नमन है उनकी सदभावना को
निर्बल के दर्द का वो सहारा था
मेघराज पँवार सबकी आँखों का तारा था।
प्रेम, दया और स्वाभिमान की वो प्रतिमूर्ति था
नेकी थी उसके हर काम में
मानवता था जिसका धर्म, ऐसी वो विभूति था
बच्चा-बच्चा याद करता है उसके योगदान को
भूल न जाना चुरू वालों उसके बलिदान को।
न छल था, न कोई कपट था
बात का वो सीधा-स्पष्ट था
गरीब की थाली
कभी न हो खाली
जीवन पर्यंत उसने की यही रखवाली
उदारता जिसका औजार था
गरीबों की खुशियां ही जिसका घर-संसार था
बच्चा-बच्चा याद करता है उसके योगदान को
भूल न जाना चुरू वालों उसके बलिदान को।
सादगी जिसकी पहचान थी
जान से प्यारा जिसको अपना ईमान था
सातों कौमौ को जिसने गले लगाया
सबको अपना समझा
कभी न किया 'ये अपना ये पराया'
बच्चा-बच्चा याद करता है उसके योगदान को
भूल न जाना चुरू वालों उसके बलिदान को।
जिसका न कोई दुश्मन था न कोई विरोध था
सबको जिसके नेक कर्मो का बोध था
किसानों के मर्म को अपना समझा
जन-चेतना की मशाल जलाई
बस एक ही काम था उसका भलाई, सिर्फ भलाई
बच्चा-बच्चा याद करता है उसके योगदान को
भूल न जाना चुरू वालों उसके बलिदान को।
आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

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