काळी-पीळी आंधी
नमस्कार आज री म्हारी कविता Kali-Pili Aandhi (काळी-पीळी आंधी) आपणे मरू प्रदेश री महिमा रो गुणगान है। इण मांय हंसी अर ठिठोली खातिर थोड़ो चटपटास भी मिलायो गयो है। उंधयाले मांय आंधी घणी बुरी लागै पण जद आज्या सागै सूंटो जणा आपने खेतां मांय मौज करदे।

काळी-पीळी आंधी
धौरा री धरती मांय
काळी-पीळी आंधी रो जौर
अठै रोटया मांय कीकर न जावै
कै तीज अर कै गणगौर।
बिमली भाभी कै नुई आई बीनणी
घणी राखै साफ-सफाई
करती फिरे पूंछा-भारी
इसी आंधी आई बुरगी सारी
काल इसी आई आंधी
दीवार पर सूं मुधो नीचे पड़गो गांधी
बाबू भायै रा घाबलिया उड़गा
कजोड़ काकै री पड़गी खुडी
आ मरज्याणी बुरगी सोक्यां नै
नई बीनणी भी लागण लागगी बूढ़ी।
सेंफां बाई रो सिणगार बिगड़गो
चंपा बाई री बिगड़गी काजळ-टिकी
महै तो जीवड़ा आ बात जाणा
धोरा री धरती मांय आंधी-सुंटे
बिन हर महफ़िल फीकी।
थारो आपणो कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
असमाना मांय धूळ चढ़गी
धूर्जण लागगो गुआड़ मांय जांटी रो बुंटो
घर-चौबारा सगळा बुरगी
काळी-पीळी आंधी
थे जिद मत छोड़ियो साहिबा
पकड़यो राखियों थारो खूंटो।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
घणो सुलगतो तावड़ो
ताती चाले लू।
हळधर उड़िके बादळी
कद नीर टपके आसमान सूं।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Please do not enter any spam link in the comment box.