घणी निमदी कुचमादी औलाद

Pramod Kumar Saini
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Ghani Nimadi Kuchmadi Aulad

घणी निमदी कुचमादी औलाद

नमस्कार आ मेरी रचना Ghani Nimadi Kuchmadi Aulad (घणी निमदी कुचमादी औलाद)  आज रै टैम रा टाबरिया री हालात नूं दरसावण री एक म्हारी कोशिश है सा। महै सोचा की या पीढ़ी म्हारे सागै इस्यो बर्ताव करें। अब इण रचना नूं पढ़ थे बताओ थारो के नजरियों है। अर थे खुद इण उम्र रा युवा हो तो थे म्हारे विचारा रै विपक्ष माथै लिख म्हाने बताओ सा। आओ पैली इण रचना रो आनंद लैवा।

Ghani Nimadi Kuchmadi Aulad

Ghani Nimadi Kuchmadi Aulad

घणी निमदी कुचमादी औलाद

(1)

न इज्जत खुद की करो थे
न राखो म्हारी लाज
आ मरज्याणी फैशन थारे माथे चढ़गी
आधो तन उघाड़ो थारो आज
कहयो थारे लागे नाही
जाणे कद आस्यो थे बाज
मायं-बापा नै करदिया बर्बाद
घणी निमदी कुचमादी औलाद

(2)

न थाने बोलणे को लौतर
न थाने चालणें रों ढंग
झाऊ लै सा बाळ थारा
देख अर ग्यारसी भाभी रैगी दंग
फाटेड़ा गाबा पैरों
बातां थारी उटपटँग
चाऊमीन रा चमचिया चाट-चाट
ल्यो थे स्वाद
घणी निमदी कुचमादी औलाद

(3)

न थाने पढ़बो सुहावै
काम करता थाने जोर आवै
बापू होटल मांय
किता दिन करस्यो थे आराम
ई मरज्याणे मोबाइल के
लिप्टया रेवो थे सुबह शाम
जंगा-जंगा थे किरकिरी कराओ
कदै तो मिनखां मांय बैठो
कदै तो माँ अर बाप नै करो याद
घणी निमदी कुचमादी औलाद

(4)

टाईम सिर थे रात मांय पड़ो कोनी
तावड़ो निकळया थे
गूदड़ा सूं काढ़ो नाड़
गुलमिळ रेणों थाने आवै कोनी
बात बात री थारी होरी राड़
क्याके क्याके घुणीयो करे बाड़
नया नया घणा तिकड़म कर लिया थे इजाद
घणी निमदी कुचमादी औलाद

 

थारो आपणो कवि 

(प्रेम) 

प्रमोद कुमार सैनी 

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