ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
सस्ता बहुत है ईमान
पर महँगा क्यों प्याज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
सुखी पड़ी है डालियाँ
हर ज़ुबान पे है गालियाँ
सर पे भ्रष्टाचारी है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
समय की इस रफ़्तार में
बेरोजगारी खड़ी है कतार में
आस बस नौकरी की आज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
चोरों के हाथ में है रखवाली
जैसे जीजा के साथ हो साली
खतरे में सब काज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
थोक के भाव बिकती है डिग्रियां
इसका भी शुक्रिया, उसका भी शुक्रिया
महंगाई ने बजाया हर साज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
टीचर बन गये है फ़टीचर
अनपढ़ हो गये हैं मिनिस्टर
न शर्मों-हया, न लाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
होती नहीं है सगाई
पूछते है -क्या है कमाई
गंजे के सर पे देखो खाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
क्या मैं बताऊँ अब सच्चाई
सोते तो है, मगर अपनी नहीं है चटाई
सर पे अरबों-खरबों का ब्याज़ है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
बदल गई है नौजवानों की चाल
जींस, टी-शर्ट का है ब्वाल
पाश्चात्य संस्कृति का ये तो आगाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
लड़कियों में बढ़ने लगा है फ़्लर्ट
साड़ी-सूट की जगह आ गया है मिनी स्कर्ट
चेहरें पर पाउडर का मसाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
अखबारों में बस खबर एक है छाई
कंही बलात्कार, कंही लड़की है भगाई
संकट में नारी समाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
गुटखे को है शौक से चबाते
खनी को ले होंठ तले दबाते
विस्की, बियर का लेते सुबह-शाम डोज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
जेब में है हर एक के है मोबाइल
एस एम एस का है नया स्टाइल
चारों ओर मिस कॉल की गाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
हमने तो बस आपको आईना है दिखाया
हकीकत से है आपको मिलाया
न समझो हम दगाबाज है
ऐ वतन हम को तुम पर नाज है
आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)



बहुत खूब 👌👌👌✍️✍️✍️
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteशानदार सर् जी
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteBahut hi achi kavita h
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