ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

Pramod Kumar Saini
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ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

नमस्कार मेरी यह रचना Patthar Dil Duniya (ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?) उन लोगों के अनुभवों को बताती है जिन्हें लोगों ने कड़वे दर्द दिए। कुछ लोग प्रेम और स्नेह को नहीं समझते है उनके दिल में भी दिमाग होता है।  उन्हें सिर्फ पैसे की भाषा आती है या दूसरों के अरमानों से खेलना आता है। 

ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है

ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

वफा और जफा के चक्कर में,
अर्थी अरमानों की जलती है।
अब तू ही बता ए-रब?
ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

इस इश्क के समंदर में,
जज्बातों की अर्थी जलती है।
सिसक-सिसक के आह निकलती है,
सादगी अक्सर छुप-छुपकर रोती है,
ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

हम उन्हें अपनाना चाहे,
वह हमें भूल जाना चाहे।
सारी रात पिंजर में गुजरती है,
ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

दोष मेरा है या उनकी फितरत का, यारों!
हम जिनके लिए जीते मरते हैं,
उनकी जान किसी और पर फिदा होती है।
ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

मेरा जो हाल है बस मैं ही जानू,
झूठ फरेब को मैं कैसे पहचानू।
दिल में इक पीड़ सी सुलगा करती है।
ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

इस जख्म को किसे दिखाऊ?
कोई अपना पास हो तो उसे बताऊ।
अपनों की नजर ही धोखा करती है,
ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

दिल में दर्द है पर होठों पर हंसी दिखाता हूं,
मुझसे कौन पूछेगा ?
इस कागज को ही हथियार बनाता हूं।
किसी को आभास ना हो इसलिए मुस्कुराता हूं।।
आंखों में मेरी अश्कों के मोती है,
ये दुनिया पत्थर दिल क्यों होती है?

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
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