ये क्या मुझ पर असर हो रहा है

Pramod Kumar Saini
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ये क्या मुझ पर असर हो रहा है

नमस्कार ये मेरी रचना Asar Ho Raha Hai (ये क्या मुझ पर असर हो रहा है) अपने दिल को जब कोई नई चीज अच्छी लगती है तो क्या अहसास होता है इसको दर्शाती है। ऐसे समय हमें लगता है की सब कुछ बदला बदला सा है। हमें उन बातों में खोने का मन करता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में ऐसे एहसासों को कभी न कभी जरूर जीता है। यह समय जीवन का सबसे खूबसूरत समय होता है। 

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ये क्या मुझ पर असर हो रहा है



ये क्या मुझ पर असर हो रहा है
ना चैन है दिल को
सुकून कहीं खो रहा है
ये क्या मुझ पर असर हो रहा है।

बदला बदला सा लगता है आसमां
बहकी बहकी सी है फिजा भी
चुपके चुपके से कोई रो रहा है
ये क्या मुझ पर असर हो रहा है।

गुमनाम है ये राज क्यों?
बदनाम है यह बात क्यों?
तितलियाँ जाग रही है
परिंदा क्यों सो रहा है?
ये क्या मुझ पर असर हो रहा है।

खामोश है अब लब भी
रूह भी है अब रुख़सत सी
यह क्या है
जो मेरे मन मंदिर को झकझोर रहा है
ये क्या मुझ पर असर हो रहा है।

ना मैं जानू
ना मेरा दिल जाने
कौन है अपना
कौन है अनजाने
ये कौन है?
जो चिकनी चुपड़ी बातें बोल रहा है
ये क्या मुझ पर असर हो रहा है।

आपका अपना
कवि
प्रमोद कुमार सैनी (प्रेम)

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