ये कैसा इंसान है

Pramod Kumar Saini
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Ye Kaisa Insan Hai
ये कैसा इंसान है

नमस्कार मेरी यह रचना Ye Kaisa Insan Hai आज के समय के इंसान और उसकी हरकतों को बतलाती है। वर्तमान समय में इंसान इंसान का शत्रु बन गया है।  अब भाई-भाई का दुश्मन हो गया है। पैसे के लालच में इंसान कोई भी निम्न से निम्न कार्य करने को तैयार हो जाता है। आइये कविता का आनंद ले -

ये कैसा इंसान है



ये कैसा इंसान है


न जाने ये कैसा इंसान है,
अपनी गलतियों से खुद होता परेशान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
एक हाथ दूजे हाथ से अनजान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
निज स्वार्थ में बस बन जाता शैतान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
अपनेपन से बिल्कुल वीरान है।


न जाने ये कैसा इंसान है,
चलता फिरता कब्रिस्तान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
घर, घर न रहा श्मशान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
पैसों के लालच में बना हैवान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
उजाड़ लिया इसने अपना गुलिस्तान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
हलख में अटकी इसकी खुद की जान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
खतरे में इसकी आन, बान और शान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
बस अपनी ही नजर में महान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
न कोई पुण्य है, न दान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
न बची कोई कन्या, न कन्यादान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
न कोई मत, न मतदान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
न कोई आचार-विचार, 
बस विकारों की खान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
न कोई पद, न पदवी
और न पहचान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
न इसका कोई गीत है,
न गान है।

न जाने ये कैसा इंसान है,
खतरे में मेरा हिंदुस्तान है
न जाने ये कैसा इंसान है..
न जाने ये कैसा इंसान है...

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

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