कल का कोहिनूर

Pramod Kumar Saini
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Kal Ka Kohinoor | कल का कोहिनूर
नमस्कार ! आपके समक्ष प्रस्तुत है मेरी नई रचना Kal Ka Kohinoor Ho । आज हमारे जहन में बहुत सवाल आते है। अब कँहा है कोहिनूर? कब वापस लौटेगा कोहिनूर? कोहिनूर क्या है ? क्या है कोहिनूर का इतिहास? क्या है कोहिनूर में खास? अब कोहिनूर किसके पास है ? न जाने कितने प्रश्न हमारे जहन के सामने है। पर ये मेरी रचना कुछ हटकर है। कोहिनूर यहां केवल एक प्रतिक है -

कोहिनूर

कल का कोहिनूर हो

1.
ये तो वक्त-वक्त की बात है,
क्या पता आज का कंकड़-पत्थर
कल का कोहिनूर हो।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

ज्वालामुखी

ज्वालामुखी हूँ मैं

2.
मैं वो मिट्टी का घरौंदा नहीं,
जो बारिश की बूंदों से पिघल जाऊ।
मैं वो ज्वालामुखी हूँ,
जो पत्थर को भी निगल जाऊ।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

शितम तू हजार कर

3.
मैं हौसला नहीं खोता,
परेशानियों को देखकर।
चाहे शितम तू जिंदगी,
एक नहीं हजार कर।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

इक अहसान कर

4.
परीक्षा तो बहुत ले रहा है ख़ुदा,
मुझको बेहतरीन खिलाड़ी जानकर।
अब इतना न परख,
ए-ख़ुदा ये एक मुझ पर अहसान कर।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

दिखावे की दुनियां

5.
दिखावे की इस दुनियां में,
हम कँहा अरमानों की बस्ती बसाये बैठे है।
अपनापन तो मारा गया,
जज़्बात औंधे मुँह लेटे है।।


प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

गुरु शिष्य


सभी गुरुजनों को समर्पित


6.
मैं निःशब्द था,
शब्द तुम्हारी देन है।
मैं अबोध था,
बोध तुम्हारी देन है।
मैं कच्ची मिट्टी था,
मूर्त रूप तुम्हारी देन है।
मैं आज जो भी हूँ,
बस आप से हूँ।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

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धन्यवाद।

आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

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