काँटों से भरा ताज

Pramod Kumar Saini
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Kanto Se Bhara Taj

काँटों से भरा ताज 

नमस्कार मेरी यह रचना Kanto Se Bhara Taj इन्सान के जीवन पर दुखों के प्रभाव को दिखाती है।  दोस्तों कभी कभी जिंदगी में दुःखो का लगातार सामना करने पर इंसान निराशा और हताशा का शिकार हो जाता है। उसे लगने लगता है कि ये जो कुछ उसके साथ हो रहा है वो केवल और केवल उसके ही साथ हो रहा है। पर दोस्तों सुख और दुःख जिंदगी के दो पहलू है प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में इनका सामना करता है। समझदार वही कहलाता है जो उनमें कोई फर्क नहीं समझता है। एक साहसी व्यक्ति दुख को भी उतने ही सहज भाव से अपनाता है जितना कि वह अपने जीवन मे सुख को अपनाता है। दोस्तों जीवन में जब कभी भी दुखों का सामना करना पड़े तो निराश होकर हाथ पर हाथ धरकर न बैठे बल्कि उस दुख को ही नई चेतना का स्त्रोत बना ले। फिर देखना जीवन का अर्थ ही बदल जायेगा।
काँटों से भरा ताज


काँटों से भरा ताज 


1.
बहते अश्कों को आगाज बना लो
टूटी गाड़ी के हर पहिये को साज बना लो
क्या पता खुशियां न हो तुम्हारे नसीब में 'प्रेम'
ग़मो का ही कांटो वाला ताज बना लो।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'



2.
जिंदगी जो भी है जिये जाओ।
दुख के घूंट भर भर जाम पिये जाओ।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

3.
वक्त क्या मिटायेगा तेरे निशां
हस्ती ही तेरी कुछ ऐसी थी।
यादें तेरी लिपट जाती है मेरे दामन से
बस्ती ही तेरी कुछ ऐसी थी।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

4.
तुमसे ही मेरी कलम में रौनक है
कैसे कह दु की तुमसे ही रंगत है
तुमसे कोई खता नहीं।
और एक तुम हो जिसे कुछ पता नहीं।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

5.
तुमसे गुफ़्तगू क्या कर लूं
शब्दो मे जान आ जाती है।
तुमसे गुफ़्तगू क्या कर लूं
शब्दों में जान आ जाती है।
बहुत कम है वो लोग
जिनसे हमारी पटरी मेल खाती है।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

6.
आपके अहसासों में बहुत दम है।
फिर क्यों आपकी आंखें नम है।।
माना हम आप नही बन सकते
पर फिर भी आप जैसे ही हम है।।

प्रमोद कुमार सैनी
'प्रेम'

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