राहत इंदौरी

Pramod Kumar Saini
0

Tribute To Rahat Indori

राहत इंदौरी

नमस्कार मेरी यह रचना Tribute To Rahat Indori मैं समर्पित करता हूँ काव्य के शिखर राहत इंदौरी जी को।

उन्होंने उर्दू शायरी जो  मुक़ाम दिया है वो बेमिसाल है।

Tribute To Rahat Indori


 
Tribute To Rahat Indori
 

Tribute To Rahat Indori

Tribute To Rahat Indori
 
1.
रूह को रूहानी अब कौन करें?
चाहत को दीवानी अब कौन करें?
उजड़ गया वो बाग
जिसमें ठहाकों का शौर था।
राहत रह गयी अब अधूरी
'इंदौरी' तेरे जैसा न कोई है 
न कोई और था
 
आसमा के सूरज को
एक तारे का नमन!
 
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
 जो स्थान शेर और शायरी में राहत साहब ने हासिल किया है वो स्थान अब अन्य किसी और के लिये हासिल कर पाना नामुनकिन है।
 
Tribute To Rahat Indori

Tribute To Rahat Indori

2.
कुछ नज्म बनाता हूँ 
गुनगुनाने के लिये
कुछ नज्म बनाता हूँ
गुनगुनाने के लिये
मैं तो हवा का झोंका हूँ
मैं नही बना ठहर जाने के लिये
 
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
दोस्तो राहत साहब की हर बात निराली है। उनकी शायरी कहने का अंदाज अनोखा था। उन के शब्द अब भी कानो में गूंजते है।
उनकी शायरी हर जुबा से बोलती है।
 
Tribute To Rahat Indori
 
3.
कभी फुर्सत मिले
तो गुफ्तगू कर लेना।
कभी फुर्सत मिले 
तो गुफ़्तगू कर लेना।
क्या पता कल गुफ़्तगू 
करना चाहो
और फुर्सत न हो।
 
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
अगर राहत साहब को काव्य का सूरज कहु तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। मैं खुद को कवि के रूप में उनके सामने कुछ नही समझता हूं।
 
Tribute To Rahat Indori
 
4.
जो गुमसुम है
सब जानकर।
होंठ सिले बैठे है
हमे पहचान कर।
उनसे तो अच्छे वो है
जो रोज हमें गालियां देते है
अपना दुश्मन मानकर।
 
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
मैंने राहत साहब को समर्पित कर अपने कुछ काव्य रचनाएं आपके सामने रखी है। 
 
Tribute To Rahat Indori
 
5.
उनको खुदा खेर बख्शे
जिनकी आंखों में चुभते है हम
 
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Post a Comment

0Comments

Please do not enter any spam link in the comment box.

Post a Comment (0)