Mera Gunah Kya Hai
मेरा गुनाह क्या है
नमस्कार पाठकों!!! आज हम फिर लेकर आये है काव्य की फुहार Mera Gunah Kya Hai शायरियों के साथ । जिसमें सौंदर्य रस की भरमार है, दर्द की पीड़ा है और प्रेरणा की झंकार है। आइये मिलकर आनंद लेते है इन काव्य चौपाइयों का हमारे इस आर्टिकल में-
झुक जाते है पेड़
1.
झुक जाते है वो पेड़,
जिनके फल लगे होते है।
बड़े चुभते है वो पल,
जब पिन चुभोने वाले उनके सगे होते है।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
पिन दिल में चुभा बैठा
2.
मकसद था मेरा हंसाना,
पर मैं ये क्या कर बैठा।
गुदगुदी करनी आती नहीं,
पिन दिल में चुभा बैठा।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
मैं अपनेपन से मोहब्बत करता हूँ
3.
समसीर से तो मैं डरता नहीं,
शर्म से मरता हूँ।
खंजर न निकाल ए बेरहम,
मेरा गुनाह बस इतना है कि;
मैं अपनेपन से मोहब्बत करता हूँ।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
मेरी कश्ती है कि रुकती नही
4.
मेरे अपने भी मेरे अपने नही,
जो टूट जाये वो सपने नही।
मकसद हैं उनका मेरी हार,
पर मेरी कश्ती है कि रुकती नही।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
एक अजनबी से अनजान से रिश्ते है मेरे
5.
एक अजनबी से अनजान से रिश्ते है मेरे,
रहता है हर दम वो दिल के पास मेरे।
भूल सकता नही मैं उसको,
फिर क्या सांझ , फिर क्या सवेरे।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
पाठकों आपका प्यार और स्नेह हमारे लिये उत्प्रेरक का काम करता है। आपका एक कमेंट हमें नई ऊर्जा से भर देता है। हमें आपके मार्गदर्शन से कभी वंचित न करें।
अपने सुझाव एवम अपने प्रेरक शब्दों से हमें अनुग्रहित करते रहें।
।।धन्यवाद।।






Wahhhhh guru ji mn ko chhu liya......
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