Dikhawati Dunia
कुदरत भी दिखावे से डरती है
नमस्कार दोस्तों !!! हमारे इस आर्टिकल 'Dikhawati Dunia' ।। 'कुदरत भी दिखावे से डरती है' में हम आपके लिए लेकर आये है निम्न काव्य रचनायें- १. कुदरत भी दिखावे से डरती है २. जिनका न कोई ज़मीर है न ईमान है ३. परेशानियों ने हमसे दोस्ती कर ली ४. न जाने किसका दोष है ५. हमें अपने से अलग मत समझ
कुदरत भी दिखावे से डरती है
1.
कुछ तो बात होगी चुम्बक में भी,
जो सोने को छोड़ लोहे से प्रेम करती है।
ये सच है दुनिया वालों,
कुदरत भी दिखावे से डरती है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
जिनका न कोई ज़मीर है न ईमान है
2.
उनसे क्या गिला और क्या शिकवा यारों,
जिनका न कोई ज़मीर है न ईमान है।
न जाने ये कैसे इंसान,
बस खुद से ही अनजान है;
मुफ़लसी औऱ गैरत के मेहमान है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
परेशानियों ने हमसे दोस्ती कर ली
3.
लगता है परेशानियों ने हमसे दोस्ती कर ली है।
हम नही चाहते इनको पर इन्होंने जबर्दस्ती कर ली है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
न जाने किसका दोष है
4.
रुक जाते है कदम उनको देखकर,
न जाने किसका दोष है।
या तो वो बेखबर है,
या कदम मदहोश है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
हमें अपने से अलग मत समझ
5.
हम या तो दिल मे किसी को बसाते नहीं,
जो अगर कोई बस जाये तो छुपाते नहीं।
कभी हमें अपने से अलग मत समझ ए मेरे हमदम,
हम धड़कनों को सांसों से जुदा करते नहीं।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
पाठकों आपका प्यार और स्नेह हमारे लिये उत्प्रेरक का काम करता है। आपका एक कमेंट हमें नई ऊर्जा से भर देता है। हमें आपके मार्गदर्शन से कभी वंचित न करें।
अपने सुझाव एवम अपने प्रेरक शब्दों से हमें अनुग्रहित करते रहें।
।।धन्यवाद।।

शानदार रचनाएं
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