जिंदगी इम्तिहान लेती है
जिंदगी इम्तिहान लेती है
1.
इतना भी गुमां न कर अपनी इद्राक पर
इफ्रात अक्ल का खात्मा कर देती है।आज गर्दिश में है गिर्दाब तो क्या हुआज़िन्दगी दानिश का भी इम्तिहान लेती है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
कठिन शब्दार्थ
गुमां= गर्व,
इद्राक= समझ बूझ, बोध
इफ़्रात= अधिकता, बाहुल्य, बहुतायत
अक्ल= बुद्धि
खात्मा= अंत कर देना, कमजोर कर देना
गर्दिश= चक्कर, घुमाव, दुर्भाग्य, आवारापन
गिर्दाब= भंवर, अतल समुद्र, बवंडर
दानिश= ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा
इम्तिहान= परीक्षा
2.
हर इक गम को आखिरी समझ
हर इक गम को आखिरी समझ
फिर से ज़िन्दगी में बहार आयेगी
जैसे अब तक कटी है
आगे भी कट जायेगी।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
वक्त नहीं है
3.
अब तो जिंदगी का ये तराना है,
थक हार के शाम को घर आना है।
रैन बसेरा हो गया है घर मेरा,
सुबह फिर से चुगा जुगने जाना है।
वक्त नहीं है अब उनके लिये
जिनके लिये मुझे चार पैसे कमाना है।
कल सब ठीक हो जाएगा
इसी चाह में अपना आज गवाना है।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
रूह से मुलाक़ात नही होती
4.
मैं उन सभी का गुनाहगार हूँ,
जिनसे मेरी अक्सर बात नहीं होती है।
दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में ऐसा फंसा हूँ,
कि मेरी खुद अपनी ही रूह से मुलाक़ात नही होती है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं जिंदगी इम्तिहान लेती है, हर इक गम को आखिरी समझ, वक्त नहीं है और रूह से मुलाक़ात नही होती पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।



बहुत खूब कहा गुरुजी आपने 👍
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteVery nice 👌sir
ReplyDeleteThank you
Deleteबहुत खूब।
ReplyDeleteBahut hi achi kavitaa bhaiji
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