जमीर सोया पड़ा है

Pramod Kumar Saini
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जमीर सोया पड़ा है

Dil-Pe-Khanjar


जमीर सोया पड़ा है


1.
अज़ीज़ से अज़ाब मिले
बड़ा अज़ब अफ़साना है।
गर ज़मीर सोया पड़ा है ज़नाब
तो जनाजा तैयार है
और मयीयत में जाना है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

शब्दार्थ
अज़ीज़-अपने
अज़ाब-पीड़ा
अज़ब-अजीब
अफ़साना-बात


अश्कों की दास्तान


2.
कुछ इस क़दर हमारे अश्क़ों की दास्तान हो गयी है,
ये मुफ़लिसी ही अब हमारी पहचान हो गयी है।
जाने क्यों रूठा है तू ख़ुदा हमसे,
अब तो पल भर की ख़ुशी भी हम पर एहसान हो गयी है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


रफ्तार जिंदगी की


3.
कुछ इस कदर तेज है रफ्तार जिंदगी की
सुबह का दर्द शाम को पुराना हो जाता है।
अब कैसे तुम्हे समझाये ए दोस्त
या तो तेरे दिल नहीं, गर दिल है तो याद रख,
दिल और दर्द का जन्म जन्मांतर का नाता है।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Duriya-Badhi-Hai-Fasale-Nahi


दूरियां बढ़ी है फासले नहीं


4.
कल तक जो हकीकत थी
आज वो अफसाना बन गया।
तुम सब ने खुशियां इतनी दी
हर पल एक तराना बन गया।

अब वो पल कँहा से लाऊँगा
सोच रहा हूँ कल कैसे कॉलेज जाऊंगा।
जब लौट लौट कर आयेगी तुम्हारी यादें
कैसे अपने दिल को बहलाऊँगा।

ये जिंदगी है साहब
जीना तो पड़ेगा।
'प्रेम' कल फिर सुबह होगी
जीवन फिर एक नये सिरे से आगे बढ़ेगा।

शुक्र है खुदा का
दूरियां बढ़ी है फासले नहीं।
हम सब एक दूजे के हमदर्द है
चाहे हम सब अब दूर दूर सही।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

पाठको मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं जमीर सोया पड़ा है, अश्कों की दास्तान, रफ्तार जिंदगी की और दूरियां बढ़ी है फासले नही पसंद आई होगी। इस प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमारे ब्लॉग से जुड़े रहे। 
धन्यवाद।।



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