KhudKo Samajh Na Paya
खुद को समझ नहीं पाया
नमस्कार पाठकों मेरी रचना KhudKo Samajh Na Paya लेकर फिर से आपके सामने प्रस्तुत हूँ। मेरी यह रचना आज के समय जगह जगह होने वाले दंगे फसादों को लेकर मानवीय सोच को दर्शाती है। हम सभी को इन सांप्रदायिक सोचों से ऊपर उठना होगा। हमारा सबसे बड़ा धर्म मानवता है यह बात हमें नहीं भूलनी है। आइये काव्य पाठ का आनंद ले।
KhudKo Samajh Na Paya
खुद को समझ नहीं पाया
मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं पर
सुना था भगवान घर घर डोल रहा था
पर इंसा दरवाजा नहीं खोल रहा था।
प्रभु ने आवाज लगाई
अब तो अपने को बचा ले भाई।
पर इंसा इस बात को पचा न पाया
लिया पत्थर और प्रभु पे उठाया।
फिर क्या प्रभु का हाल बुरा था
इंसा भगवान को कुचलने जो उतरा था।
इस पत्थरबाजी से ईश्वर भी घबराया
बोला तू क्या खुदा को समझेगा
तू तो खुद अपने को ही समझ न पाया।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
KhudKo Samajh Na Paya
भाई भतीजावाद
इंसानियत हो रही शर्मसार
कब रोकेगा इंसा, इंसा पर अत्याचार
अब भाई भतीजावाद बढ़ रहा घर घर
गली गली हो रहा बाजरू धर्म का प्रचार
कोख में कुचली रही है नारी को नारी
पांडित्य का दिखावा है अब न बचा कोई ब्रह्मचारी
गरीब के घर खाने के टोटे
नेताजी के घर आलू के परोंठे
महंगाई की बढ़ रही मारम्मार
जाने कहाँ सोई पड़ी है सरकार
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
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धन्यवाद।।


बहुत ही मर्मस्पर्शी कविता है
ReplyDeleteHeart touching lines sir
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteBeautiful lines with a great relevance.
ReplyDeleteReally Deep lines sir 👌
ReplyDeleteNice one please keep it up
ReplyDeletevinash ka
ReplyDeletevipareet buddhi