ये वतन है हर इंसान का

Pramod Kumar Saini
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ये वतन है हर इंसान का

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ये वतन है हर इंसा का

मुल्क़ को तबाह करके
क्या पायेगा इस्तमा करके।
रुक जा वतन को खोखला न कर
ख़ुदा के नाम पर ठहर जा
और ख़ुदा को शर्मिंदा न कर।
न मुल्क हिन्दू का है
न मुसलमाँ का
ये वतन है हर इंसा का।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचना ये वतन है हर इंसा का पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हम से जुड़े रहे।
धन्यवाद।।

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11Comments

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  1. क्या खूब लिखा है बहुत मजेदार

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  2. भिडियो को नहीं समझाओ पाओ गे मित्र वैसे आप कोई भी हो लिखते बड़ा अच्छा हो

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  3. अच्छाई को किसने देखा है!
    कभी राम बनी तो बनी कभी मदर टेरेसा,
    अच्छाई को किसने देखा है !
    कभी आई गुरुद्वारे से तो, तो आई कभी मस्जिद से ,
    अच्छाई को किसने देखा है!
    कभी दी जिंदगी तो कभी मौत भी,
    मर के भी दे गए वह दान में अपने शरीर भी,
    अच्छाई को किसने देखा है!
    मौत का नंगा नाच देखते रह गए ,
    कभी जिंदगी आई थी कभी जिंदगी गई थी
    अच्छाई को किसने देखा है !
    हर वक्त हर जगह हर समय मिलती है अच्छाइयां पर अच्छाई को किसने देखा!!!
    धन्यवाद

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    1. अच्छाई होगी तो दिखेगी जरूर। चाहे कितना ही वक्त गुजर जाये

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