कोरोना और सामान्य जनजीवन

Pramod Kumar Saini
0


 

 कोरोना और सामान्य जनजीवन

नमस्कार हम आपके सामने प्रस्तुत है लेकर हमारी रचना कोरोना और सामान्य जनजीवन
कोरोना और सामान्य जनजीवन

 कोरोना और सामान्य जनजीवन

कोरोना में डॉक्टर और समस्त चिकित्सा विभाग

"वाह बेटा मौज करदी,
अरे वाह बेटा मौज करदी।"

कोरोना में सरकारी नोकरी वाले

"मैं चाहे ये करू वो करू मेरी मर्जी।"

कोरोना में गैर सरकारी अध्यापक

"तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकली रही
की लूट गये हां लूट गये हम तेरी मुहब्बत में।"

कोरोना में राजनेता

"दम मारो दम मिट जाये गम
बोलो हर सुबह शाम
हरे कृष्णा हरे राम।"

कोरोना में राजनेताओं के चमचे

"आइए हुजूर तुमको सितारों में ले चलू
दिल झूम जाये ऐसी बहारों में ले चलू।"

कोरोना में मतदाता

"ये पब्लिक है ये सब जानती है
अंदर क्या है, बाहर क्या है
पहचानती है।"

कोरोना में किसान

"ओ मेघा रे मेघा रे पानी तू बरसा रे।"

कोरोना में विद्यार्थी

"आई रे आई रे खुशी।"

कोरोना में निजी संस्था संचालक

"कब आओगे कब आओगे
देर न हो जाये यार मेरे कब आओगे।"

कोरोना में पुलिसकर्मी

"कोई लौटा दे मेरे बीते हुये दिन
बीते हुये दिन वो प्यारे पलछिन।"

कोरोना में आम आदमी

"पिंजरे के पंछी रे
तेरा दर्द न जाने कोय।"

कोरोना में सब्जीवाला

टिंडा, भिंडी अनार बेचूँ
लेनी है तो लयो
अब न मैं कोई न उधार बेचूँ

आलू लगास्यु 10 का पाव
संतरा का मत पुछो अब थे भाव
सस्ता केवल भाव है
10 रिपिया मं किलो आरी सब्जी
अब 10 रिपिया पाव है।

कोरोना में किराने की दुकानवाला

चीनी ले लयो
चाय क्यासे पिस्यो
गुटका, खनी बिना
थे किंया जिस्यो

उधार खातों बन्द कर दियो
तानसेन करदी 10 की तीन
सगळा नवाबा की अकड़ निकळ ज्यासी
औज्यूँ तो घणा रंग दिखासी ओ चीन

कोरोना में गैर सरकारी मास्टर

कको, बारहखड़ी
A, B, C, D सीखा दयू
जै भेजो मेरकन थारे टाबरिया न सरकार
भूखों बैठ्यो हूँ
पर हाथ कोनी फैलाओ
ई लोकडौन म क़ि न कमायो।

आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Post a Comment

0Comments

Please do not enter any spam link in the comment box.

Post a Comment (0)