बेटी और बहु

Pramod Kumar Saini
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बेटी और बहु

नमस्कार ये मेरी रचना Beti or Bahu (बेटी और बहु) हमारे समाज की हकीकत को दर्शाती है। हम सब अपनी बेटियों के लिये सारे अधिकार और खुशियां चाहते है लेकिन हम दूसरे की बेटीयों (बहुओं) को वो अधिकार नहीं देना चाहते है। हमने बेटी और बहु के बीच बहुत बड़ा अंतर कर रखा है। मेरी यह कविता समाज को आईना दिखाने वाली कविता है।

Beti or Bahu

बेटी और बहु

गर बेटी से महकता है घर-आंगन
तो फिर बहु क्यों घर का काल है?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी है जान से प्यारी
तो फिर बहु क्यों लगती है खारी?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी है ज़िगर का टुकड़ा
तो फिर बहु का क्यों नहीं सुहाता है मुखड़ा?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी है सोने का हार
तो फिर बहु का क्यों नहीं सुहाता है श्रृंगार?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी है फूल सी कोमल
तो फिर बहु की क्यों खटकती है पायल?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

Beti or Bahu

बेटी और बहु

गर बेटी के लिये हाजिर है सारी धन-दौलत
तो फिर बहु को क्यो नहीं मिलती है
घर के काम से मोहलत?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी को है छूट आजाद होकर जीने की
तो फिर बहु को क्यों नहीं है फुर्सत पानी तक पीने की?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी की सारी गलतियों पर आंखे बन्द है
तो फिर बहु ही होती क्यों पाबंद है?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी में सारे जमाने की खुशियाँ समाई है
तो फिर बहु में क्यों दिखती काम वाली बाई है?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी के लिये हर पल मुख पर वाह-वाहाई है
तो फिर बहु क्यों लगती पराई है?
झांककर देखो अपने-अपने गिरेबां में
सच है क्या?
और कैसा ये सवाल है?

गर बेटी हमारी आँखों का तारा है,
तो फिर बहु भी घर का उजियारा है।
सोच बदलोगे तो किस्मत बदल जाएगी,
बहु में झांककर देखो, बेटी नजर आएगी।

गर बेटी को मिले उसका हक
तो फिर बहु को भी हर हक दिलाना होगा।
सोच बदलोगे तो किस्मत बदल जाएगी,
बहु में झांककर देखो, बेटी नजर आएगी।

आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

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