मुझे शिक्षक ही रहने दो

Pramod Kumar Saini
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Anguish of a Teacher

मुझे शिक्षक ही रहने दो 

नमस्कार दोस्तों मेरी यह रचना Anguish of a Teacher, मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो आज के समय के निजी क्षेत्र के शिक्षक की पीड़ा को दर्शाती है।  समाज में वास्तविक शिक्षा की समझ शायद लुप्त हो गयी है।  आइये काव्य का आनंद ले -

Anguish of a Teacher

Anguish of a Teacher

मुझे शिक्षक ही रहने दो 

(१)

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो 

मेरे भी कुछ अरमां  है, मुझे भी कुछ कहने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(२)

इतना भी मत गिराओ मुझे 

थोड़ी तो इज्जत रहने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(३)

माना विद्यार्थी तुम्हारी धरोहर है 

क्योंकि वो तुम्हारे लिए धन के सरोवर है 

थोड़ी बयार मेरी भी वाणी की बहने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(४)

मेरे पल-पल का तुम हिसाब लगाते हो 

मेरी नियत को तुम खराब बताते हो 

समय की इस धारा को न रोको 

इसे कल-कल बहने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(५)

चप्पे-चप्पे पर तुमने जासूस बिठा रखे है 

पग-पग पर तुमने काँटे बिछा रखे है 

विश्वास रखो, यूँ न तुम विश्वास को मरने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

Anguish of a Teacher

(६)

पाई-पाई का तुम हिसाब लगाते हो 

शिक्षा का तुम मोल-भाव करते हो 

पीठ पीछे गालिया निकालने वालों 

मेरे सामने क्यों हिचकिचाते हो। 

गुरु की शिक्षा का कोई मोल नहीं 

इसे अनमोल ही रहने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(७)

मेरी मेहनत पर स्वांग रचाने वालों 

जरा खुद को सम्भालों 

मत रोको इस आंधी को 

इसे यूँ ही चलने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(८)

मत डालो मेरे हाथ-पैरों में जंजीरे 

यूँ ही नहीं बनती कागज पर तस्वीरें 

घुटन हो गयी जिंदगी मेरी 

मुझे भी कुछ अपने दिल की कहने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(९ )

तुम तो हो बस इस माया के जाल में 

मैं कैसे दिखाई देता तुम्हें फटेहाल में 

दो बूँद मेरी हलक में 

मेरे बच्चों की थाली में भी रूखी-सुखी रोटी रहने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(१०)

बिका नहीं है अभी मेरा ज़मीर 

चाहे कितना भी दिखूं मैं तुम्हे फ़क़ीर 

मेरी मेहनत पर पलने वालों 

मेरी भी तक़दीर बनने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

(११)

गुरु को खरीदने वालों 

अब अपने वजूद को सम्भालों 

चमचों की बातों पर अमल  न करो 

मेहनत और सच्चाई को पलने दो। 

मैं एक शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो । । 

 

आपका अपना कवि 

प्रमोद कुमार सैनी 

(प्रेम)

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