अब कांई करस्यो
अब कांई करस्यो
किंया जिस्यो अर किंया मरस्यो
सांची लागै तो राख्यो
काळजै र लगार
झूठी लागै तो मेरे सिर माथै थारा जूता।
मिनखा को ही जीणो कलडो हो रियो है
अब किंया जिसी परमेश्वर काका
आपरळी गळी आरा कुत्ता।।
भुगानो ताऊ छैल भंवर बण्या
वोटा मांय खुलो फिरयो
लगावै बीड़ी अर तम्बाकू का सुठा पर सुठा।।
जद तो थे दरोगा जी कुछ बोल्या ही कोनी
अब थे किंया लेर हो रिया हो
ले हाथा मांय जूता।।
तरबिणी भाभी डीजे पर घणी नाची
लुगाया देखती रैगी आछी की आछी
अब कर्फ्यू मांय घरा बैठी सोचे
आ मरज्याणी कोरोना किंया आगी पाछी।।
जीवणि ताई ई रंडार कोरोना री दो दो सुया खाई
घर मं पड्या बर्तन सगळा बाजण लाग ग्या
टके री रही न कमाई
ई काळै मुण्डा री कोरोना ने
पाछी कुण बुलाई।।
पप्पू भायौ सिटी घणी बजाई
भर भर गिलासिया आइसक्रीम सगळा खाई
अब कर्फ्यू मांय घरा बेठसी
आता जाता का मुंडा देखसी
पर इंया किंया काम चालसी
किंया भरसी औलादा को मुंडों
ई मरज्याणी कोरोना को बाळ दयौ झुण्डों।।
बिहारियों, सुंदरियों ओज्यो क्लास डाक ग्या
गहलोत अर डोटासरा जी माटी खाग्या
भोमली बरतो पकड़नो भूलगी
ग्यारसी की गुमगी पाटी
शुभकणो काको खार खाया बैठ्यो
जै सामने मिनख बण आज्या
तो ई कोरोना कै दे दयू गोळा लाठी।।
सरकारी अफसरा कै मौज होगी
न कोई काम महीनों पुरो होत्या सेती घरा आज्या दाम
जीतू भायो छुप छुप टाबर पढावै
बिको जीवड़ो ही जाणै बो किंया घर चलावै
मांगणिया सुबह शाम पोळी खुड़कावै
आ मरज्याणी कोरोना धंधों खागी
अब ई बला सूं कुण बचावै।।
थारो आपणो कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


बहुत अच्छा लिखा है सर आपने
ReplyDeleteइस कविता कि हर एक बात बिल्कुल सही है आम आदमी की मुसीबत वहीं की वहीं है।
👌👌👌✍✍✍✍🌺🌺
ReplyDeletemarvellous
ReplyDelete👌👌👌
ReplyDeleteअच्छी कविता है ...
ReplyDeleteआम इंसान का जीना हराम है सर कोई ज्याए तो किधर जाए बच्चो का भविष्य हो रहा खराब है । नेता लोग मौज कर रहे है और बिचारा आम आदमी ये सोचता है कि शाम को जुगाड़ कैसे होगा खाने का।कोई नही सोचता है सर बहुत अच्छी बात कही आपने।
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