जो है खुद सतरंगी उसको क्या रंग लगाऊ मैं!नमस्कार दोस्तों हम लेकर हाजिर है हमारी नई काव्य रचना Kya Rang Lagau Mai
काव्यवस्तु:
एक बार भगवान श्रीकृष्ण और राधा को फिर से धरती पर चलकर रास लीला करने का विचार आया तो यह निश्चय हुआ कि भगवान श्रीकृष्ण पहले किसी परिवार में जन्म लेंगे बाद में राधा कंही अलग परिवार में जन्म लेगी।
सब कुछ पूर्वनिश्चित योजना के अनुसार हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने एक सामान्य बालक के रूप में भारत देश के राजस्थान प्रान्त के मण्डावा कस्बे में एक शिक्षक रामलाल के घर जन्म ले लिया।लेकिन अब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कलयुग में हुआ था तो उनमें अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिजनों के सब कलयुगी संस्कार आ गये थे। वो बिल्कुल एक सामान्य कलयुगी युवक जैसे थे। उधर राधा ने फतेहपुर कस्बे के सेठ धन्नालाल के घर जन्म ले लिया। राधा पर कलयुगी दुष्विकारो का कोई असर नही हुआ। फिर संयोंग वंश जब श्रीकृष्ण की आयु लगभग 21 वर्ष की थी उनकी मुलाकात राधा से होली पर्व के उत्सव पर होती है। राधा भगवान श्रीकृष्ण को जान नही पाती है तब भगवान श्रीकृष्ण उसे अपने बारे में बताते है। तब राधा को बहुत आश्चर्य होता है। जो बात राधा ने कलयुगी भगवान श्रीकृष्ण को कही वही काव्य की काव्यवस्तु है-
जो है खुद सतरंगी उसको क्या रंग लगाऊ मैं!
जो है खुद सतरंगी
उसको क्या रंग लगाऊ मैं।
छल, कपट है जिसकी रग-रग में
उसको क्या प्रेम दिखाऊ मैं।।
जो है खुद छलिया
उसको क्या समझाऊ मैं।
स्नेह, प्रेम को जो भूल गया है
उसको क्या मोह दिखाऊ मैं।।
जो है खुद पाखंडी
उससे क्या रास रचाऊँ मैं।
घृणा, द्वेष है जिसके लहू के कतरे-कतरे में
उसको क्या बार-बार मनाऊ मैं।।
जो है खुद चितचोर
उसको हृदय में कैसे बिठाऊँ मैं।
शर्म, हया सब बेच दी जिसने
उससे क्या आस लगाऊ मैं।।
जो है खुद भोग-विलासी
उससे क्या वैराग्य निभाऊ मैं।
लोक लाज सब भूल गया है जो
उस भेड़िये से क्या रिश्ता निभाऊ मैं।।
आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


बहुत ही बढ़िया सर्..@Ravindra
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