खामोश आवाज
नमस्कार इस पोस्ट Khamosh Aawaj में हम आपके लिए लेकर आये है एक काव्य रचना जिसमे एक सामान्य आदमी के मनोभावों को लिया गया है। आज के इस संसार में आम आदमी के मनोभावों की कोई कद्र नहीं है। हर बार आम आदमी का ही शोषण होता है। उसे अपने जीवन में बहुत सारे काम करने पड़ते है। उस पर परिवार , पति , पत्नी , माता - पिता और बच्चों की जिम्मेदारियां होती है।
वह सुबह उठता है तो इस चिंता में की कैसे वह आज अपने परिवार का पेट भरेगा और सोता है तो इस आशा में की कल का सूरज उसके जीवन में जरूर उजाला लाएगा। इसी दौड़ धुप में वह अपना बचपन, जवानी और बुढ़ापा सब दांव पर लगा देता है। मगर कभी भी वो अपने जीवन में अपने खुद के भावों की परवाह नहीं करता है। उसे भी अपने सपने पूरा करने का हक़ है। हमें उसके भावों की क़द्र करनी चाहिए। आओ एक आम आदमी के दर्द को समझे उसे महसूस करें -


Nice poem bhaiya
ReplyDeleteGajab... Boss
ReplyDeleteVery nice sir
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