मेरा दर्द किसी ने न जाना

Pramod Kumar Saini
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मेरा दर्द किसी ने न जाना

नमस्कार दोस्तों आज की मेरी Mera Dard Kisi Ne Na Jana आज के समय के एकाकीपन को दर्शाती है। आज के समय में इंसान एकल परिवार में रहना पसंद करता है जिसके कारण वह अपने जज्बात परिवार में किसी से नहीं बाँट सकता है। आज का समय स्वार्थी है सब कामकाज केवल स्वार्थ के बल पर हो रहे है। लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए कुछ भी कर जाते है। दूसरों के जज्बातों से खेलना लोगों की आदत बन चुकी है। उन्हें बीएस फिक्र है तो अपने स्वार्थ पूर्ति की।  बाकि सब बातें उनके लिए बेमानी है- 

मेरा दर्द किसी ने न जाना



मेरा दर्द किसी ने न जाना

अपनों के बीच; कोई बेगाना
मैं सबकी सुनता रहा
पर मेरा दर्द किसी ने न जाना।

भूली बिसरी बातें; कैसा अफसाना
दिल के जख्मों का कोई मलहम नहीं
गर मिल जाए तो मुझकों भी बतलाना।

नग़मे, गजल; कोई चुभता तराना
जिंदगी जब जहनुम बन जाए
तो कैसे हो गुनगुना।

नशा, जाम; क्या खूब सजा मयखाना
झूमती बोतलें, झूमता जमाना
जिस दिन घर बस जाए तब रुक जाना।

झूठ, फ़रेब; कोई खंज़र क़ातिलाना
अहसान करके बार-बार जतलाना
अब औऱ न रहम फरमाना।

कसमें, वादे; क्या खूब याराना
वफ़ा के बदले जफ़ा 
क्यों मुहब्बत को भुला रे जमाना।

दिल, ज़िगर; कोई नगमा पुराना
पग-पग पर जो हमसफ़र बदले
उनसे वफ़ा की क्या उम्मीद लगाना।

मंजिल, साहिल; कैसा फ़साना
वो लूटते रहे, मैं लुटता रहा
और कितना सुनाऊ मेरे नसीब का फ़ूट जाना।

आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

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