गज़ल की कोई क़िताब हो तुम

Pramod Kumar Saini
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गज़ल की कोई क़िताब हो तुम 

नमस्कार दोस्तों आज की मेरी रचना Gajal Ki Koi Kitab Ho Tum सौंदर्य रस की एक बेहतरीन कविता है इसमें प्रेमी अपनी प्रेमिका के बारे में अपने विचार रख रहा है। वह अपनी प्रेमिका को रिझाने की कोशिश कर रहा है इसलिए वह बार बार उसे कई उपमाओं से रिझाने की कोशिश की गयी है। प्रेम एक बेहतरीन जीवन की दें है। यह ईश्वर द्वारा इंसान को दिया गया बेहतरीन तोहफा है जो हर किसी को उसके जीवन में नहीं मिलता है।

जिस पर ईश्वर अपनी कृपा बरसाते है उसे खुदा का ये बेहतरीन तोहफा मिलता है। ईश्वर ने भी जब जब धरती पर अवतार लिया है तब तब उन्होंने भी अपनी और से इसमें कुछ न कुछ जोड़ने की कोशिश की है जिस प्रकार से भगवन कृष्ण ने राधा के साथ प्रेम की अनूठी मिशाल कायम की। जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श प्रेम के रूप में जानी जाती है। 

गज़ल की कोई क़िताब हो तुम

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गज़ल की कोई क़िताब हो तुम 

वर्षों  से जो चाहा, वो सुनहरा ख़्वाब हो तुम
मेरी हसीन गजलों की कोई क़िताब हो तुम। 

तलाश है हर किसी को चाँदनी की,
मेरे लिए तो ख़ुद एक चाँद हो तुम। 

आश है सब को चमन में बहारों की,
मेरे लिए तो कभी न मुर्झाने वाला ग़ुलाब हो तुम। 

बातें करते हैं लोग मूरत दिल में बसने बसाने की,
मेरे लिए तो गीता और क़ुरान हो तुम। 

कसमें खातें हैं प्रेमी बिछड़ के न जीने की,
मेरे लिए तो जीने का आख़री मुक़ाम हो तुम। 

आपका अपना कवि 
प्रमोद कुमार सैनी 
(प्रेम)

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