आओ दिवाली मनाये

Pramod Kumar Saini
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आओ दिवाली मनाये

नमस्कार दोस्तों आज की मेरी रचना Aao Diwali Manaye हमें दीवाली मनाने का सच्चा अर्थ समझाती है। दीवाली बुराई पर अच्छाई के प्रतिक का त्योंहार है। हमें नफरत और द्वेष को भूलकर प्रेम के दिप जलाने चाहिए। हमारे अंदर जो बुराइया आ गयी है हमें उनका परित्याग करना चाहिए। 

आओ दिवाली मनायें

आओ दिवाली मनाये

नफरत को छोड़े,
एक दिप प्रेम का जलाये।
आओ दिवाली मनाये।।

स्वार्थ को छोड़े,
एक दिप निस्वार्थ का जलाये।
आओ दिवाली मनाये।।

जात पात को भूले,
एक दिप इंसानियत का जलाये।
आओ दिवाली मनाये।।

ईर्ष्या, द्वेष को त्यागे,
एक दिप सहयोग का जलाये।
आओ दिवाली मनाये।।

हिंसा, झगड़े से दूर रहे,
एक दिप भाईचारे का जलाये।
आओ दिवाली मनाये।।

लूट-पाट, चोरी-डकैती छोड़े,
एक दिप अमन-चैन का जलाये।
आओ दिवाली मनाये।।

विदेशी संस्कृति का परित्याग करें,
एक दिप स्वदेशी का जलाये।
आओ दिवाली मनाये।।

प्रमोद कुमार सैनी
कवि(हिंदी एवं मायड़ भाषा राजस्थानी)
प्राध्यापक (आंग्ल भाषा )
निजी शिक्षण संस्थान

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