आओ दीप जलायें

Pramod Kumar Saini
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आओ दीप जलायें 

नमस्कार मेरी यह रचना Aao Deep Jalaye (आओ दीप जलायें) हमें दिवाली के पवन पर्व पर हिलमिल के रहने की प्रेरणा देती है। इस त्योंहार पर हमें अपने आपसी सभी बेर भाव भूलकर सबको हृदय से लगाना चाहिए। 

 
आओ दीप जलायें

आओ दीप जलायें

दिल से दिल मिलायें
आओ दीप जलायें  

नहीं कोई बेगाना 
सबको आज गले लगायें 
आओ दीप जलायें 

इस धरा के सब वासी 
क्या अपने क्या परायें  
आओ दीप जलायें 
 
आंसुओं को पूछें 
खुशी के गीत गाऐ 
आओ दीप जलायें 
 
अब ना लड़ेंगे, बस आगे बढ़ेंगे 
आसमा को जमीन पर लायें 
आओ दीप जलायें 

मानवता है धर्म अपना 
जन-जन को समझायें 
आओ दीप जलायें 
आओ दीप जलायें 

प्रमोद कुमार सैनी (प्रेम )

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