सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
नमस्कार मेरी यह रचना Pyara Hindonstan Hamara हमारे देश की वर्तमान व्यवस्था पर एक व्यंग्य है।
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| Photo Source : gaana.com |
हमारे भारत की महिमा निराली है। भारत के कण कण में एक नई कहानी है। भारत की खिली खिली हर डाली है। ये देशप्रेम है जो हम सब मे समाया है। पर इसके विपरीत यथार्थ भी है जो अलग है। आज की इस कविता के माध्यम से हमनें आपको यथार्थ से परिचित करवाने की कोशिश की है।
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
तन नंगा, पेट खाली; जमकर लगाओ नारा।।
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
पढ़े लिखे हैं, युवा भी है,
पर नौकरी नहीं है मेरे देश में,
कैसे हो अब उनका गुजारा।।
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
बीए की डिग्री वाले पान बनाते हैं,
अंगूठा लगाने वाले सरकार चलाते हैं,
कोई फिरे गली-गली कुंवारा।।
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
इसकी अलग रियासत, उसका अलग सूबा,
यह भी चमत्कारी, वह भी अजूबा,
यह खाए दाल-बाटी, वह चबाये चारा।।
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
महंगाई की मार, बढ़ता भ्रष्टाचार,
पल-पल बेरोजगारों की लंबी होती कतार,
अब क्या करें नरेंद्र मोदी बेचारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा......
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteवर्तमान समय में सटीक बैठती कविता , वास्तविकता को बखूबी बयां करती हुई। 👌👌👌👌👌👌✍️✍️✍️✍️
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