अपने और पराये

Pramod Kumar Saini
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अपने और पराये

इस काव्य कुंज Apne Or Praye में हम देखेंगे कि कैसे आजकल के लोग अपनापन दिखाते है। मुँह से कुछ बोलते है और सच को छुपाते है। जब तक गरज है बस रिश्ते निभाते है।

आज के समय मैं कौन अपना है ? और कौन पराया ?समझ पाना मुश्किल है। हर व्यक्ति अपने चेहरे पर मुखोटे ओढ़े घूम रहा है। झूठ और फरेब हर चहरे की निशानी बन गयी है। जाने ये वक्त अब कँहा ले जायेगा?

आज के समय मैं कौन अपना है और कौन पराया समझ पाना मुश्किल है। हर व्यक्ति अपने चेहरे पर मुखोटे ओढ़े घूम रहा है। झूठ और फरेब हर चहरे की निशानी बन गयी है। जाने ये वक्त अब कँहा ले जायेगा।



अपने और पराये
(1)
ये मत पूछो-कैसे हो?
लड़ रहा हूँ हालातों से
बहुत थक गया हूँ
रूखी रूखी बातों से

कैसा हूँ मैं?
बस मैं जानता हूँ
अपने और पराये
को बखूबी पहचानता हूँ

कैसे हो आप?
नहीं पूछता हूँ अब किसी से
हो सके तो कर देना मुझे माफ़
जाने कब करेगा ख़ुदा ये इंसाफ

(2)
ग़र तुम्हें भी कोई शिक़वा हो तो बता दो यारों
जाने कब जिंदगी की आखरी सांस हो
बस घड़ी दो घड़ी का वक्त मेरे पास हो।


(3)
मैं कैसे भूल जाऊ 
मेरे फ़र्ज़ बड़े है।
मेरे ज़ख्म को हरा रखने,
मेरे अपने खंजर लिये खड़े है।।



(4)
मुझे ख़बर मिलती है 
तुम्हारे मर्ज़ की गैरों से।
जाने किस हक से 
तुम मुझे अपना कहते हो।।


(5)
तुम्हारे सपनों का मैं हिस्सा नहीं
तुम्हारे अफसानों का मैं क़िस्सा नहीं।
काश की तुम मुझे समझ पाते
यूं खून के आंसू न रुलाते।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

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