Aao Ek Rakhi Bandhe
आओ एक राखी बांधे
नमस्कार मेरी यह रचना Aao Ek Rakhi Bandhe (आओ एक राखी बांधे) आपके सामने प्रस्तुत है। इसमें मैंने इस पवित्र पर्व और उसके महत्त्व के बारे में बताने की कोशिश की है
आओ एक राखी बांधे
राखी नाम है विश्वास का।
राखी नाम है मधुर अहसास का।।
जब-जब बहिन पर कोई विपदा आये।
राखी की आन बचाने कोई न कोई भाई चला आये।।
राखी न समझे माँ जाये,
न समझे अपने-पराये।
राखी उस हाथ पे बंधे,
जो बहिन की लाज बचाये।।
राखी नाम नही है इक रेशम की डोर का।
राखी सदियों से जलता चिराग है भौर का।।
राखी को न सिर्फ कलाई का धागा तू मान।
राखी की महिमा को जान, ए-नादान इंसान।।
राखी रक्षक है हर नारी का।
राखी काल है हर अत्याचारी का।।
जग में नही है कोई राखी का मोल।
राखी को ए इंसान तू न पैसों में तौल।।
राखी के लिये सब बन्द दरवाजे खोल।
दिल से 'प्यारी बहिना, बहिना बोल'।।
राखी का त्योंहार जब भी आता है।
बहिन-भाई के मधुर रिश्तों की याद दिलाता है।।
कोई चार लम्हो में भूल जाता है।
सच्चा भाई वहीं जो जीवन भर,
इस बंधन को निभाता है।।
कोई बांधे हीरे-मोती, कोई बांधे धागा।
जिसकी कलाई सुनी वो है अभागा।।
महंगी सस्ती न तू राखी को बोल।
हर धागा जब राखी बन जाता है,
तो हो जाता है अनमोल।।
नारी पर अत्याचार बढ़ रहा है इस जमाने मे।
अभी कोई देर नही हुई है जाग जाने में।
समाज सुधर जायेगा राखी को अपनाने में।।
प्रमोद कुमार सैनी (प्रेम)
आओ एक राखी बांधे
आओ एक राखी बांधे
देश के जवानों को।
आओ एक राखी बांधे
देश के किसानों को।
आओ एक राखी बंधवाए
देश के अमर शहीदों की विधवाओं से।
आओ एक राखी बंधवाए
देश की गरीब माताओं से।
आओ एक राखी बंधवाए
देश की हर काम वाली बाई से।
रक्षा करें उसकी अपने अंदर बसे कसाई से।।
आओ एक राखी बंधवाए
देश की सेविकाओं से।
प्रण ले उसकी रक्षा का भूखे भेड़ियों से।
मुक्त कराये उसे दासता की बेड़ियों से।।
आओ एक राखी नवाये
अमर शहीदों की समाधियों पर।
जिन्होंने जीवन अपना लूटा दिया
हमला बोल देश के अपराधियों पर।
आओ एक राखी खरीदें
गरीब भाई-बहिन के चोले से।
शायद उसका भी जीवन बदल जाये
तुम्हारे चार आने पाने से।
आओ एक राखी भेंट करें
अत्याचारी, दुष्ट और शैतानो को
इक भावनात्मक प्रहार करें इन बेइमानों को।
आओ एक राखी भेंट करें
देश के नेताओं को,
की वो रक्षक है जनता आम के।
क्यों चिपके बैठे है केवल बस दाम के।।
आओ एक राखी बांधे देश की गो- माताओं को।
भूखा न मरने दे सनातन संस्कृति की धाताओ को।।
आओ एक राखी बांधे हर इक पेड़ को।
जब तक रहेंगे रक्षा करेंगे
कटने न देंगे जीवन की इस मेड़ को।।
आओ एक राखी बांधे.....
आओ एक राखी बंधवाए....
आओ एक राखी नवाये....
प्रमोद कुमार सैनी (प्रेम)



Bahut achchha Guruji
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteNice poem bhaiya
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