बनावट और मिलावट का दौर

Pramod Kumar Saini
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Banawat Or Milawat

बनावट और मिलावट का दौर

नमस्कार दोस्तों  आज कि मेरी रचना Banawat Or Milawat लेकर आपके सामने एक बार फिर प्रस्तुत हूँ। इस रचना में मेरी कुछ काव्य चौपाइयाँ है जो हमें बदलते वक़्त की बदलती तस्वीर से रूबरू करवाती है। इसमें निम्न चौपाइयाँ सम्मिलित है -

1. कहानी तेरी भी सुनाई जायेगी एकदिन
2. ए ख़ुदा तेरे सिवा कौन बदल सकता है भाग्य की रेखा
3. वक्त सबका हिसाब रखता है
4. बनावट और मिलावट का दौर है
5. हर तरफ Forward का जोर है

Banawat Or Milawat




1.
कश्ती तेरी भी साहिल से जा टकराएगी एकदिन,
किश्मत तेरी भी रंग लाएगी एकदिन।
मांझी तू हिम्मत न हार,
कहानी तेरी भी सुनाई जायेगी एकदिन।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)





2.
जुल्म भी देखा, शितम भी देखा और दोगोले लोगों की बातों का दम भी देखा।
पर ए खुदा तेरे सिवा कौन बदल सकता है भाग्य की रेखा।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)



3.
वक्त-वक्त का हिसाब रखने वाले याद रख,
वक्त सबका हिसाब रखता है;
जो आज खुलकर हंसता है,
वो भी कल को रोता है।
जिनके सर पर है आज ताज,
उसे भी कल को मोहताज रखता है।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


4.
बनावट और मिलावट का ये दौर है,
हर नकली चीज मजबूत और असली कमजोर है।
मेहनत और ईमानदारी बिकती है कौड़ियों में,
झूठ, फ़रेब और चापलूसी का ही शोर है।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)



5.
हर तरफ Forward का जोर है,
इस साइबर युग में हर कोई चोर है।
पके पकाये विचारों पर अपनी मोहर है,
सबकी सर्जनात्मक शक्ति हो गयी कमजोर है।
बचके रहना मेरी कलम थोड़ी कठोर है।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

पाठकों आपके द्वारा हमारी काव्य रचनाओ को प्यार और दुलार देने के लिये हमारी पूरी टीम आपकी आभारी है।
आशा है इसी प्रकार आपका सहयोग हमें मिलता रहेगा।
धन्यवाद।।

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