Gumnam Rishte Ho Gye
गुमनाम रिश्ते हो गये है
नमस्कार दोस्तों !!!! हमारे इस ब्लॉग Gumnam Rishte Ho Gye गुमनाम रिश्ते हो गये है में हम आपके लिए लेकर आये है हमारी काव्य रचनाये - गुमनाम रिश्ते हो गये है , जो तेरी तक़दीर में नहीं वो कैसे पायेगा, हे भगवान! देख गुरु का गिरता स्तर, आओ मुल्क की मिट्टी से वफ़ा करें और क्योंकि मैं इंसान हूँ। ये सभी काव्य रचनाये प्रत्येक व्यक्ति से कंही न कंही जुड़ी हुई है। अतः ये केवल कवि के मनोभाव मात्र ही नहीं है बल्कि सभी लोगों के जीवन की सच्चाई है। हम सब इन मनोभावों को अपने जीवन में कंही न कंही अनुभव करते है।
गुमनाम रिश्ते हो गये है
1.
कुछ ऐसे गुमनाम रिश्ते हो गये है,
जानकर भी अनजान हो गये है।
बस उनको ही खबर नही है यारों,
उनकी एक नजर पाने को हमारे हाल बेहाल हो गये है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
- दोस्तों आजकल रिश्तें गुमनाम हो रहे है। हमारी काव्य रचना गुमनाम रिश्ते हो गये है इस सच्चाई को ही हमारे सामने लाने का प्रयत्न कर रही है।
- आजकल हम जानकर भी एक दूसरे से अनजान होते जा रहे है। हमारी रिश्तों के प्रति ये अनदेखी जाने हमें आगे ओर कैसे कैसे दिन दिखलायेगी।
- रिश्तों की ये जो अनदेखी है वो दोनों तरफ से है। कोई भी अकेला दोषी नहीं है। अगर रिश्तों में दोनों तरफ से समान रूप से प्रयास नहीं किये तो ये मानकर चलिए की रिश्तों के ये डोर बहुत ही नाजुक हो चुकी है और एक हल्के से झटके से टूट सकती है।
जो तेरी तक़दीर में नहींवो कैसे पायेगा
2.
न रख शोलों पर पांव 'प्रेम'
जल जायेगा।
जो तेरी तक़दीर में नहीं
वो कैसे पायेगा।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
- दोस्तों हमारी काव्य रचना ब्लॉग गुमनाम रिश्ते हो गये है की दूसरी काव्य रचना जो तेरी तक़दीर में नहीं वो कैसे पायेगा वो हमारे अथक प्रयासों को बताती है। जब हम पर किसी वस्तु या व्यक्ति को पाने का जूनून हो जाता है तो हम अपना हर संभव प्रयास करते है चाहे वो वस्तु या व्यक्ति भगवान ने हमारी नियति में ही क्यों नहीं लिखा हो।
- सकारात्मक रूप से यह कुछ हद तक हमारे लिए बहुत ही हितकारी होती है।
- नकारात्मक रूप से ऐसा जूनून बड़ा ही घातक होता है।
हे भगवान! देख गुरु का गिरता स्तर
3.
जब गुरु ही योग्यता को गिराने लगे
जब गुरु ही योग्यता को सताने लगे
जब गुरु ही योग्यता को मिटाने लगे
तो ऐसे गुरु से ग्वार बेहतर
हे भगवान! देख गुरु का गिरता स्तर।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
- दोस्तों हमारे ब्लॉग गुमनाम रिश्ते हो गये है की तीसरी काव्य रचना हे भगवान! देख गुरु का गिरता स्तर आज के समय में गुरुओं के गिरते स्तर को बताती है।
- कभी कभी गुरु भी अपने शिष्यों की योग्यताओं के बिच जानबूझकर अंतर पैदा कर देते है।
- जो वास्तव में योग्य शिष्य है उसकी प्रतिभा के साथ खुद उसी के गुरु के द्वारा अन्याय किया जाता है।
- जबकि अयोग्य शिष्य को उचित ठहराया जाता है, उसे बार बार प्रोत्साहन दिया जाता है।
- कवि ऐसे गुरु से ग्वार को श्रेष्ठ बताता है।
आओ मुल्क की मिट्टी से वफ़ा करें
4.
उन्हें क्या पता, ये नया तराना क्या है,
उन्हें क्या इल्म, ये नया अफ़साना क्या है।
आओ मुल्क की मिट्टी से वफ़ा करें,
देश के गद्दारों से इंतकाम ले, रफा दफा करें।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
- दोस्तों हमारे ब्लॉग गुमनाम रिश्ते हो गये है की चतुर्थ रचना आओ मुल्क की मिट्टी से वफा करें एक देशप्रेम से ओतप्रोत काव्य रचना है।
- हमारा देश भिन्न भिन्न जाति और धर्म के लोगों का अनूठा देश है।
- हम सब को जाति और धर्म से ऊपर उठकर ही सोचना चाहिए जैसा की हमारे पूर्वजों ने किया था।
- अगर इस दौरान कोई भी अपने देश से धोखा करता है तो वह गद्दार है।
- उसे देश में रहने का कोई हक नहीं है।
क्योंकि मैं इंसान हूँ
5 .
दर्द होता है क्योंकि मैं इंसान हूँ,
गर होता कोई शैतान तो न रोता
न अपना चैन और शुकून खोता
सबको कुछ न कुछ गीले शिकवे है मेरे से,
फिर मैं कैसे अनजान हूँ।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
- दोस्तों हमारे ब्लॉग गुमनाम रिश्ते हो गये है की पंचम रचना क्योंकि मैं इंसान हूँ मर्मस्पर्शी काव्य रचना है।
- इंसान कुदरत की श्रेष्ठ रचना है।
- केवल इंसान ही जिसके सीने में गहरे मनोभाव होते है।
- इंसान तलवार के घाव सहन कर सकता है लेकिन शब्दों के घाव नहीं।
- सवेदनशीलता ही इंसान को इंसान बनाती है।
धन्यवाद।।






गुरु जी अति उत्तम एक शिक्षक होने के नाते मैं आज शर्मिंदा हु मैरी भी लालसा ऐसी थी कि मुझे बच्चे अच्छे अच्छे गिफ्ट दे और जब बच्चे बहुत गिफ्ट देते थे तो में अपने आप को श्रेष्ठ समझता था पर आज आप कविता के माध्य्म से पता चला में इस लिय नहीं बना
ReplyDeleteएक अच्छा गुरु वही है जो निःस्वार्थ भाव से अपने सभी शिष्यों को समान समझता है।
ReplyDeleteSuperrr
ReplyDeleteगुरुजी आप मे वो गुण है जो मिट्टी को सोना बना दे खुद कर्म के शिवाय कुछ न करे लेकिन अपने गुणों से मांझी को साहिल दिला दे ।।
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