मंजिल अभी बाकी है
नमस्कार दोस्तों!!!
मेरा यह आर्टिकल 'मंजिल अभी बाकी है' आपको बतायेगा की मंजिल क्या होती है? यह कैसे प्राप्त की जाती है? इस आर्टिकल में मैंने निम्न रचनाओं को सम्मिलित किया है-
1. न जाने किस किस का हौसला हूँ मैं
2. मेरा कोई साहिल नहीं
3. वक्त वक्त की बात है
4. तेरी खुमारी तुम्हें ले डूबेगी
5. तूफां कब साहिल पे रुका है
6. ठोकरों ने जीना सीखा दिया
न जाने किस किस का हौसला हूँ मैं
1.
कैसे कह दु की थक गया हूँ मैं
मैं रुक नही सकता
मेरी मंजिल अभी बाकी है
न जाने किस किस का हौसला हूँ मैं
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
टिप्पणी: दोस्तों जीवन मे दुख, दर्द, परेशानियां बहुत आती है। ऐसा नही है कि ये केवल आपके साथ हो रहा है। सबके जीवन मे ऐसी बहुत सारी रुकावटे आती है। पर हमें हिम्मत रखनी होती है। हमें कभी भी इन परेशानियों के सामने घुटने नही टेकने चाहिये। असफलता महज सिक्के का एक पहलू है हो सकता है कि बार बार आपके हिस्से में एक ही पहलू आ रहा हो। लेकिन यह कतई मुमकिन नही की आपके हिस्से में दूसरा पहलू कभी नही आयेगा। अगर हम अपने हौसले को खो दे तो ऐसा जरूर होगा। हमे सिक्के को उछालते रहना है एक न एक दिन सिक्के का दूसरा पहलू आपके पक्ष में भी जरूर आयेगा। मेरा मतलब है कि हमे अपने प्रयास लगातार करते रहने है। सफलता जरूर हमारे कदमो में होगी। आपकी सफलता और असफलता आपसे ज्यादा आपसे जुड़े लोगों के लिये भी महत्व रखती है उन सभी को मध्य नजर रखते हुए प्रयास करें।
मेरा कोई साहिल नहीं
2.
कैसे रोकोगे मुझे, मैं जज्बातों का एक शैलाब हूँ,
इस आग के दरिया को चीर के निकलने को बेताब हूँ।
मेरा कोई साहिल नहीं, मेरा है न कोई ढिकाना,
अब तेरी मर्जी, जी चाहे जितना मुझे सताना।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
टिप्पणी: दोस्तों इंसान को गुलाम बनाया जा सकता है लेकिन उसके जज्बातों को कभी भी गुलाम नहीं बनाया जा सकता है। जज्बातों की कोई सीमा नहीं होती है। जज्बातों का ना तो कोई ठिकाना होता है और ना ही कोई मंजिल होती है। इसलिए अगर हम किसी इंसान को मानसिक या शारीरिक दंड देते हैं तो हम केवल और केवल उसके शरीर को अपने वश में कर सकते हैं जबकि उसका मन और उसके जज्बात है उन पर हम काबू नहीं पा सकते हैं।
वक्त वक्त की बात है
3.
ये तो वक्त वक्त की बात है साहिब
किसी का रूपिया चार आने में नही चलता
और किसी की चवन्नी रुपये पर भारी
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
टिप्पणी: दोस्तों वक्त एक ऐसी चीज है जो कि हीरे को भी कोयला बना देती है और कोयले को हीरा बना देती है। मेरा अभिप्राय है की चाहे कोई व्यक्ति कितना भी प्रतिभाशाली क्यों ना हो अगर वक्त उसके पक्ष में नहीं है तो वह उस प्रतिभा से कुछ भी हासिल नहीं कर सकता है। इसी प्रकार अगर कोई अयोग्य व्यक्ति के पक्ष में वक्त है तो उसके द्वारा कहीं गई निम्न से निम्न बात भी बहुत मायने रखती है तथा उसके द्वारा किया गया एक तुच्छ कार्य भी लोगों के लिए बड़ी अहमियत रखता है। अतः में प्रतिभाशाली लोगों से कहना चाहूंगा कि वह सही वक्त का इंतजार करें। और अपने प्रतिभा पर पूर्ण विश्वास रखें। जब भी वक्त उनके पक्ष में होगा तो उनकी प्रतिभा उन्हें सफलता के सर्वोच्च शिखर पर ले जाएगी। यह उसी प्रकार है जिस प्रकार की हवा हमेशा एक दिशा में नहीं बहती है अर्थात हवा की दिशा भी समय-समय पर बदलती रहती है। वक्त वक्त लेता है लेकिन वक्त वक्त के बाद सबको कुछ ना कुछ देता है।
तेरी खुमारी तुम्हें ले डूबेगी
4.
मेरी मासूमियत पर हंसने वाले
तेरी खुमारी तुम्हे ले डूबेगी।
बहुत अभिमान है तुम्हे तेरी बुलंदी पर,
तेरी गर्दन भी किसी के सामने छुकेगी।
गर यू ही चलता रहा तेरा कारवा,
तो तेरी कश्ती जरूर डूबेगी।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
टिप्पणी : दोस्तों गर्व, घमंड, अभिमान यह एक बहुत बड़ी बुराई है। दुनिया में आज तक कोई भी इस बुराई से बच नहीं पाया है। किसी को दौलत का नशा होता है, किसी को शोहरत का नशा होता है, तो किसी को हुस्न का नशा होता है, तो किसी को जवानी का नशा होता है, किसी को नशा होता है अपनी ताकत पर, तो किसी को नशा होता है अपनी सोबत पर। यहां नशा जो है वह गर्व है घमंड का प्रतीक है। उस गर्व या घमंड में इंसान सब कुछ भूल जाता है उसे यह लगता है कि मेरे ये दिन अब हमेशा हमेशा मेरे साथ रहेंगे। लेकिन दोस्तों ऐसा नहीं है अगर हमें दौलत मिली है, अगर हमें शोहरत मिली है, अगर हमें हुस्न मिला है, अगर हमें जवानी मिली है तो कहीं ना कहीं यह हमारे अच्छे कर्मों का फल है। विगत समय में हमने जो अच्छे कर्म किए हैं उनके कारण आज हमें यह अच्छे दिन देखने को मिले हैं लेकिन यह दिन हमारे साथ ता उम्र नहीं रह सकते। यह निर्भर करता है कि हमने कैसे कर्म किए हैं? कैसे कर्म हम कर रहे हैं? और कैसे कर्म हम करेंगे? उसके अनुसार ही आगे हमारा भाग्य निर्धारित होता है। अगर गर्व में, घमंड में हम अपने आप को ही भूल जाए तो यह निश्चित है कि हमारा अंत समीप है। अतः हमें सही और गलत का ध्यान हमेशा रखना चाहिए और हम जो भी कर्म करें उससे पहले हमें सोचना चाहिए कि क्या उचित है और क्या अनुचित है।
तूफां कब साहिल पे रुका है
5.
मेरे आँसू तेरे दिल के अरमान है,
तेरी अकड़ भी निकल जायेगी;
किस बात का तुम्हें गुमां है।
क्यों पीछे पड़ा है मेरे,
तूफ़ां कब साहिल पे रुका है।
कितने पत्थर तू फेंक मुझ पर,
पर्वत कब दरिया के सामने झुका है।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
6.
गलतफहमियों में जी रहा था मैं
हकीकत से वाकिफ़ न था
तेरा शुक्रिया ए मेरे मौला
चंद ठोकरें देकर तूने जीना सिखला दिया।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
टिप्पणी: दोस्तों किसी पर भी आंख मूंद कर विश्वास कर लेना एक बहुत बड़ी भूल है क्योंकि जब इस विश्वास का कत्ल होता है तो इंसान बुरी तरह तरह से टूट जाता है। उसे लगता है की आगे से मैं किसी पर भी कोई विश्वास नहीं करूंगा। पर दोस्तों सच तो यही है कि इंसान को समय-समय पर ये जो ठोकरें मिलती है वे ठोकरे इंसान को जीना सिखलाती है। एक वास्तविक अनुभव उसके जीवन में लेकर आती है और इन्हीं अनुभवो के आधार पर उसका आगे का जीवन निर्धारित होता है इन्हीं अनुभवो से उसका वास्तविक व्यक्तित्व निर्माण होता है अर्थात ठोकरें जीवन का एक अहम हिस्सा है। यूं कहे तो गलत नहीं होगा की यह भगवान द्वारा हमें दिया गया एक ज्ञान है जो इस प्रकार से व्यवहारिक रूप से हमें दिया जा रहा है। कुछ लोग इनसे सीखते हैं और कुछ लोग इनसे कुछ नहीं सीखते हैं।
पाठकों मेरी रचनाओं को इतना प्यार और स्नेह देने के लिये, धन्यवाद । इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।



बहुत ही सहज तरीक़े से शानदार रचनाएं 👌👌✍️✍️
ReplyDeleteदिल से आभार
DeleteWahhhhhhhhhhhhh
ReplyDeleteSpeechless .....
धन्यवाद जी
DeleteVery true
Deleteधन्यवाद सपना जी
Deleteये तो वक्त वक्त की बात है साहिब
ReplyDeleteकिसी का रूपिया चार आने में नही चलता
और किसी की चवन्नी रुपये पर भारी
Best lines