1.
ठोकरें भी बहुत जरूरी है जिंदगी में,
कौन अपना है और कौन पराया?
सिखलाती है।
चिट्टी कब अपना हौसला खोती है,
चाहे सामने खड़ा उसके हाथी है।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
जमीर गिरवी पड़ा है
2.
फ़नाह वही होते है,
जिनके सर पर कफ़न होता है।
ज़मीर जिनका गिरवीं पड़ा है,
वो जिंदा नहीं मुर्दा खड़ा है।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
खुद को खुदा ना समझ
3.
खुद को ख़ुदा समझने वाले,
मत छीन किसी के हल्क से निवाले।
एक घड़ी ऐसी भी आएगी,
तेरी भी अर्थी उठाई जायेगी।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
रंगो भरी रंगोली
4.
रंग लो सबको अपने रंग में
अब ना रहे कोई किसी वहम में
अपने ही रंग की रंगोली हो
बुरा न मानो होली हो
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
5.
आपणी मिट्टी रे कण कण म होळी है
हरियाळी धान अठे
खुशियां री मुस्कान अठे
गांवा री लुभाती सूरत भोळी है
आपणी मिट्टी र कण कण म होली है
उड़ती लाल चुनरिया अठे
पगड़ी रो रंग केसरिया अठे
बारह कोश मांय बदळती बोली है
आपणी मिट्टी र कण कण म होळी है
गोरी रो नीलो नीलो घाघरियो
पिळए पोतड़े म बिलघतो टाबरीयो
मारवाड़ी मुच्छया पर घणी मरोड़ी है
आपणी मिट्टी र कण कण म होळी है
सोने री धरती अठे
काळती कुजाता रो डेरो अठे
धोळए दुधा री गऊ माँ बोळी है
आपने मिट्टी र कण कण म होळी है
इंद्रधनुष रा सारा रंग अठे
मिळजुळ रैवे लोग अठे
ई धौरा री धरती की महिमा निराळी है
आपणी मिट्टी र कण कण म होली है
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
श्रद्धा और विश्वास को जिंदा रखें
6.
श्रद्धा और विश्वास को जिंदा रखे
तिरस्कार की जलायें होली
आओ मनाये होली
उमंग और होंसले की माला पिरोये
हताशा की उठायें डोली
आओ मनायें होली
जोश और जुनून को जिंदा रखें
निराशा संग खेले आंखमिचौली
आओ मनाये होली
उम्मीद का दामन न छोड़े
झूठ और फरेब की मटकी फोड़े
बनाकर सूरत भोली
आओ मनाये होली
ज़मीर को जिंदा रखें
आत्मा की न लगाये बोली
आओ मनाये होली
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं कौन अपना है कौन पराया है, जमीर गिरवी पड़ा है, खुद को खुदा ना समझ, रंगो भरी रंगोली, कण-कण मेंं होली है और श्रद्धा और विश्वास को जिंदा रखें पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हम से जुड़े रहे।
धन्यवाद।।



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