आखिर दोष किसका है

Pramod Kumar Saini
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आखिर दोष किसका है

Aakhir-Dosh-Kiska-Hai


दोष किसका है

1.
दोषी तो वही सबसे बड़ा है
जो सबकुछ सुनकर भी 
चुपचाप खड़ा है।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


रिश्तों में मिट्ठास 

2.
रिश्तों में मिठ्ठास अधूरी है,
अपनेपन का एहसास जरूरी है।
प्रेम की कीमत चुकाई नही जाती,
अपनों को दौलत दिखाई नही जाती।
अपनों का सम्मान जरूरी है,
मैं गरीब हूँ ये मेरी मजबूरी है।
कब तुम समझोगे मेरे जज़्बात को,
मत देखो मेरे हालात को।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


आओ फिर से महफ़िल सजायें 

3.
आओ फिर से महफ़िल सजायें।
बुझी हुई चिरागों को फिर से जलायें।।
कुछ नग़मे गुनगुनाये।
कुछ जख्मों को मरहम लगायें।।
रूह को रूह से मिलायें।
गिले-शिकवे सब भुलायें।।
अपनो को फिर से मनायें।
खुद हंसे और सबको हंसाये।।
आओ फिर से महफ़िल सजायें।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


सच का सामना 

4.
कहते है कि सच का कोई सामना
नहीं कर सकता।
फिर पत्नी के बारे में 
आपके क्या विचार है?

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Sulgti-Delhi




दिल्ली हिंसा 

5.
सुना था, दिल्ली दिलवालों का शहर है,
फिर क्यों हो रहा ये कहर है।
सुना था, दिल्ली सबकी सुनती है,
फिर क्यों खून की होलियां मनती है।
सुना था, दिल्ली दया का सागर है,
फिर क्यों हाथों में लट्ठों की बागर है।
सुना था, दिल्ली बहुत गहरी है,
फिर क्यों यँहा की सरकार बहरी है।
सुना था, दिल्ली के सब मुरीद है,
फिर क्यों, रतनलाल जैसे जवान शहीद है।

Delhi-Hinsa-Victim



भाई रतनलाल की शहादत को नमन।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं दोष किसका है, रिश्तों में मिट्ठासआओ फिर से महफ़िल सजायेंसच का सामना और दिल्ली हिंसा पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।

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