गणतंत्र पर काला साया है

Pramod Kumar Saini
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गणतंत्र पर काला साया है

Gantantra-Par-Kala-Saya-Hai


गणतंत्र पर काला साया है

1.
गणतंत्र पर काला साया है
कोहराम मचा है लठ्ठों का।
दिमाग वाला चुप बैठा है
हो हल्ला चल रहा है ऊल्लू के पट्ठों का।
अब मुल्क की फ़िक्र किसे
झगड़ा बढ़ रहा है पट्टो का।
वतन पर अब जां कौन लुटाये
भाव पूछ रहा यंहा हर कोई सट्टो का।
प्रतिभाशाली दाने-दाने को मोहताज
देखो जमाना आ गया अब नटों का।
क्या बंया करू अब वतन की हालत
राजनीतिकरण हो रहा मठों का।
प्रमोद कुमार रूह तो  है अब तेरी भी घायल
क्या हाल कर लिया तूने अपने कंठो का।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


गणतंत्र है तू

2.
गणतंत्र है तू
गणतंत्र है तेरी जान
उठ खड़ा हो
अपनी ताकत को पहचान
देश की उन्नति की खातिर कर मतदान
फूंक दे इस गणतंत्र की रूह में प्राण।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)


दो राहे पर खड़ी है जिंदगी

3.
गर पराये होते तो लड़ जाता,
पर अपनो से कैसे लड़ जाऊ।
किस हाल में हूँ मैं ए दोस्त,
अब तुम्हे कैसे बताऊ।

कहते है जन्म देने वाली का;
हम पर एहसान है,
किस हाल में मैं हूँ ए दोस्त,
तू इस बात से अनजान है।

दो राहे पर खड़ी है जिंदगी;
जिस्म तो जिंदा है ए दोस्त,
पर रूह मेरी लहूलुहान है।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

To-My-Beloved-Wife


To My Beloved Wife

4.

तुम मिली तो न जाने क्या खजाना मिला।
क्या खूब जीने का बहाना मिला।।

हसरते मेरी न जाने कब तुम से जुड़ गई।
तुमने मुस्कुरा के क्या देखा, बात आगे तक बढ़ गई।।

फिर लेने लगी, न जाने क्यों ख्वाहिशें परवान।
हमें मिलाया, कैसे भुला दूँ रब का अहसान।।

घर-आँगन महक उठा न जाने क्यों तेरे आने से।
बगिया मेरी खिल उठी, तेरे मुझे चाहने से।।

तुमने न जाने क्यों सबको इतना मान-सम्मान दिया।
अपना कुछ नही समझा, सबके लिये हर पल जीया।।

गर तुम्हें गलत समझू तो मेरी नादानी है।
मैं हूँ आग तो तू पानी है।।
आखिर तेरे संग मुझे हर जन्म में जिंदगी जो बितानी है।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Utho-Deho-Fir-Basant-Aaya

उठो देखो फिर बसन्त आया

5.
मौसम ने फिर ली अंगड़ाई
पेड़ो पर भी पीलापन छाया
उठो देखो फिर बसन्त आया।

चलने लगी है पीर पुरवाई
सूरज भी गरमाया
उठो देखो फिर बसन्त आया।

कोयल ऐसे कुकी, जैसे बजी कोई शहनाई
पक्षियों की चहचहाट ने मुझे जगाया
उठो देखो फिर बसन्त आया।

मैंने भी कलम उठाई
मां शारदे को शीश नवाया
उठो देखो फिर बसन्त आया।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं गणतंत्र पर काला साया है,गणतंत्र है तूदो राहे पर खड़ी है जिंदगी, To My Beloved Wife और उठो देखो फिर बसन्त आया पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।
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