1.
तुम मुझे रोक सकते हो
मेरे कदम नहीं
डरकर पीछे हट जाये
ऐसे हम नहीं
मजबूर तो मैं हूँ
पर मेरी क़लम नहीं
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
सूरज भी उगता है तो ढलता है जरूर
2.
आज सितारे बुलंद है तेरे
तो तुम्हें हो रहा है गरूर
सम्भल जा दौलत के मद में
मत हो इतना मग़रूर
सूर्य भी उगता है
तो ढलता है जरूर
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
3.
मैं लौटकर आऊंगा
मैं बादल नही बरसात का
जो पल में फट जाऊ
मैं लौटकर आऊंगा
मैं पतंगा नहीं आधी रात का
जो जल जल जाऊ
मैं लौटकर आऊंगा
मैं साया नहीं हूं रात का
जो उजाले से डर जाऊ
मैं लौटकर आऊंगा
मैं तो बोल हूं तेरे लब का
किसी को न सुहाउ
लौटकर तेरे दर ही आऊ।
तभी तो दुनिया गोल है कहलाऊं।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
पाठकों मैं आशा करता हूँ कि आपको मेरी रचनायें दुनिया गोल है, सूरज भी उगता है तो ढलता है जरूर और मैं लौटकर आऊंगा पसंद आयी होगी।
धन्यवाद ।।



गुरुदेव दिल खुश कर दिया आपने
ReplyDeleteआभार
DeleteSandaarrrr..... 👌👌👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteशानदार प्रमोद जी
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteSandarr sir ji
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteअति उत्तम गुरुजी
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