कोरोना आपदा या साज़िश

Pramod Kumar Saini
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कोरोना : आपदा या साज़िश

Corona-Aapda-Ya-Sajish

कोरोना: आपदा या साज़िश

1.
जिन साँपो को दूध पिलाकर पाला था
अब वो काट खाने लगे है।
ये तो हम ही बेवकूफ़ थे
इस ज़हर को पहचानने में 
ज़माने लगे है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

तू नाराज तो है भगवान हमसे

2.
तू नाराज तो है भगवान हमसे
वरना मंदिरों के पट बन्द नहीं होते।
तू नाराज तो है ख़ुदा हमसे
वरना मस्जिदों में सज़दे न रुकते।
तू नाराज तो है गॉड हमसे
वरना चर्चों की घण्टिया नहीं रुकती।
तू नाराज तो है परवरदिगार हमसे
वरना गुरुद्वारे में गुरु वाणी न रुकती।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

मर्ज और दवा 

3.
अब तो मंजर ये है फिजाओं का
लेने गये थे दवा
और ले बैठे मर्ज हवाओं का
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Ameer-Garib

अमीर और गरीब

4.
न होता कोई अमीर और गरीब
तो तेरा क्या जाता ए-जिंदगी
न होता कोई अपना और पराया
तो तेरा क्या बदल जाता ए-जिंदगी
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कोरोना : अमीर और गरीब

5.
कोरोना : अमीर और गरीब
अमीर:
कल तक जिनको फुर्सत न थी काम से,
अब छुप के बैठे है घरों में कोरोना के नाम से।
गरीब:
वो जो दाने दाने का मोहताज था,
मुट्ठी भर जिसके पास अनाज था।
दिल्ली से आगरा जिसके लिये दूर नहीं,
जो मौत से पल पल लड़ता हो;
उसे कोरोना का कोई ख़ौफ़ नहीं।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं कोरोना: आपदा या साज़िश, तू नाराज तो है भगवान हमसेमर्ज और दवाअमीर और गरीब और कोरोना : अमीर और गरीब पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।

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