बेटीयाँ

Pramod Kumar Saini
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बेटियाँ : ईश्वर की सबसे सुंदर सौगात

🌸 भूमिका

बेटियाँ केवल परिवार का हिस्सा नहीं होतीं, वे घर की मुस्कान, संस्कारों की पहचान और प्रेम की जीवंत प्रतिमूर्ति होती हैं। जिस घर में बेटियों की किलकारियाँ गूँजती हैं, वहाँ खुशियों का वास होता है। वे माता-पिता के जीवन में स्नेह, सम्मान और आत्मीयता का ऐसा रंग भरती हैं, जिसकी तुलना किसी भी अनमोल धरोहर से नहीं की जा सकती।
आज प्रस्तुत है कवि प्रमोद कुमार सैनी (प्रेम) की हृदयस्पर्शी कविता "बेटियाँ", जो बेटियों के महत्व और उनके प्रति प्रेम को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करती है।
बेटियाँ



✍️ कविता : बेटियाँ

ख़ुदा की नायाब देन,
बेटियाँ मेरी सुकून और चैन।

आँगन की बहार हैं,
बेटियाँ संस्कार और सद्व्यवहार हैं।

ख़ुशियों का सुरूर हैं,
बेटियाँ मेरी कोहिनूर हैं।

अंधकार में उजियारा हैं,
बेटियाँ बुढ़ापे का सहारा हैं।

जीवन की उजली किरण हैं,
बेटियाँ ईश्वर का स्मरण हैं।

बेटे यदि बुढ़ापे की लाठी हैं,
तो बेटियाँ घर की कद और काठी हैं।

जिस घर में बेटियों की हँसी गूँजती है,
वहीं खुशियों की गंगा बहती है।

ईश्वर की सबसे सुंदर सौगात हैं बेटियाँ,
धरती पर प्रेम और ममता की बात हैं बेटियाँ।

— थारो आपणो कवि
प्रमोद कुमार सैनी 
(प्रेम)

📖 कविता का भावार्थ

यह कविता बेटियों के महत्व को अत्यंत सरल और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत करती है। कवि के अनुसार बेटियाँ ईश्वर का अनमोल उपहार हैं, जो परिवार में प्रेम, संस्कार और खुशियाँ लेकर आती हैं। वे केवल माता-पिता का सहारा ही नहीं बल्कि पूरे परिवार की गरिमा और पहचान होती हैं।
कविता में बेटियों की तुलना कोहिनूर, उजली किरण और आँगन की बहार से की गई है, जो उनके अमूल्य और जीवनदायी स्वरूप को दर्शाती है। कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि बेटियाँ किसी भी दृष्टि से बेटों से कम नहीं हैं, बल्कि वे घर की आत्मा होती हैं।

🌺 बेटियों का महत्व

बेटियाँ परिवार में प्रेम और संवेदनशीलता का संचार करती हैं।
वे संस्कारों और नैतिक मूल्यों की वाहक होती हैं।
माता-पिता के सुख-दुख में सच्चा साथ निभाती हैं।
समाज को सशक्त और संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
वे दो परिवारों को जोड़ने वाली प्रेम की मजबूत कड़ी होती हैं।

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