दिल में भी दिमाग होने लगे है

Pramod Kumar Saini
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दिल में भी दिमाग होने लगे है

नमस्कार दोस्तों आज की हमारी रचना Dil Me Bhi Dimag Hone Lge Hai रिश्तों की बिगड़ती हालत को दर्शाती है। रिश्तो के बिच जो दुरी बढ़ती जा रही है वो हमारे समाज के लिए बड़ी घातक है। अपनापन और लगाव खत्म हो रहा है। हम अपने आदर्शो को छोड़कर पाश्चात्य संस्कृति के गुलाम हो रहे है। यह एक बहुत ही दुखद स्थिति है।  एक वो भी जमाना था जब लोग बिना किसी मतलब के एक दूसरे के हालचाल पूछते थे। राश्ते में चलते बच्चें को गांव का कोई भी व्यक्ति अपना समझ डांट सकता था और आज हम हमारे पड़ौसी तक को नहीं जानते की वो कौन है। दूसरा व्यक्ति कौन क्या करता है इससे हमें कोई मतलब नहीं है। अगर यही चलता रहा तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को हम क्या संस्कार देंगे -


दिल में भी दिमाग होने लगे है


दिल में भी दिमाग होने लगे है

खत्म हो रही है
अब रिश्ते-नातो की अहमियत
अब तो लोगों के दिल में भी दिमाग होने लगे है।

बढ़ रही है दूरियां बहुत
लद गया वो वक्त जब सबको मामा-नाना कहते थे
अब तो अपने भी बेगाने होने लगे है।

समझते थे अपनेपन की अहमियत
वो वक्त पुराना था
अब तो मय्यत पर रूठने-मनाने लगे है।

शालीनता थी परिहान में
संस्कारों की तो बात न करो
अब तो फट्टी जींस सिलवाने लगे है।

फिक्र और जिक्र था सबका
बिन बुलाये आते थे जाते थे
अब तो शादीयों के भी कार्ड छपवाने लगे है।

बहुत चहल-पहल होती थी गलियों में
त्यौहारों पर लोक गीतों की फुहार थी
अब तो बात बात पर डी जे बजाने लगे है।

आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)



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4Comments

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  1. Absolutely perfect 👌👌✍✍

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  2. बहुत अच्छी बात कही है सर् सब कुछ बदल रहा है अब तो

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