वाह री ज़िंदगी

Pramod Kumar Saini
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वाह री ज़िंदगी

नमस्कार दोस्तों आज की मेरी Wah Ri Zindgi लोकडाउन का आम आदमी पर क्या क्या असर पड़ा उस पीड़ा को दिखाती है। 

 Source:Aaj Tak
                              

वाह री ज़िंदगी

वाह री ज़िंदगी
दिल, जिगर सब तोड़ दिये
बस जिंदा मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
सब राहों में कांटे बिछा दिये
बस बेराह मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
चैन-शुकूँ सब छीन लिये
बस बेचैन मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
जीने के सब अरमान छीन लिये
बस बूत बनाकर मुझको छोड़ दिया।

वाह री जिंदगी
जीने की सब उम्मीदें छीन ली
बस बेसहारा मुझको छोड़ दिया।

वाह री जिंदगी
जिनको खबर थी मेरी
उन्हें मुझसे छीन लिया
बस बेखबर मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
उजाले सब छीन लिये
बस अंधकार में मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
दिल की हसरते सब छीन ली
बस बीच भवँर मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
उमंगे सब छीन ली
बस उदासीन मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
रास-रंग सब छीन लिये
बस बेरंग मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
अठखेलियाँ सब छीन ली
बस हैरान मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
रिश्ते-नाते सब छीन लिये
बस अनजान मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
हँसी-ठिठौली सब छीन ली
बस ग़मगीन मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
जीत-हार सब छीन ली
बस बीच मझधार मुझको छोड़ दिया।

वाह री ज़िंदगी
कसमें-वादे सब छीन लिये
बस बीच भूल-भुलैया मुझको छोड़ दिया।

वाह री जिंदगी...
वाह री जिंदगी...

आपका अपना कवि
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

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