Ahasan Gumnami Ka
अहसान गुमनामी का
Ahasan Gumnami Ka || अहसान गुमनामी का। नमस्कार दोस्तों!!! मैं आपका अपना कवि प्रमोद कुमार सैनी (प्रेम) एक बार फिर से हाज़िर हूँ लेकर काव्य रचनाओं की सौगात। हमारे इस काव्य संग्रह Ahasan Gumnami Ka || अहसान गुमनामी का में हम आपके लिये लेकर आये है कुछ दिल को छू लेने वाली काव्य पंक्तिया। आशा करता हूँ कि ये आप के दिल और दिमाग को भी छूकर निकलेगी। तो फिर आइये और इन काव्य रचनाओ का आनंद उठाइये।
1.
मंदिर, मस्जिद वीरान।
मयखानों में सजी महफ़िल।।
स्कूल, कॉलेज सुनसान।
जरूरी है चबाना गुटखा और पान।।
ज्ञानी बैठा है मौन होकर।
मूर्ख बांटे ज्ञान पे ज्ञान।।
तेरी जय हो जय हो हिंदुस्तान।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
2.
गर तू मेरी खुशी नहीं बन सकता
तो गम बनकर ही आजा
ताकि मेरा प्रेम रहे हरदम ताज़ा।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
3.
भौंकते है कुत्ते बात बात पर
क्योंकि उन्हें न खाना है न खाने देना।
गायें तो अक्सर रंभाती सुनी गई है।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
4.
जो मेरे अहसानों
के कर्जदार है।
मैं उनका
गुनहगार हूँ।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
5.
वो चूकते नहीं मौका
मेरी बदनामी का।
मैं हूँ कि अहसान
भी करता हूँ गुमनामी का।।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
6.
गर मैं चुप रहूँ
किसी से कुछ नहीं कहूँ
सब कुछ हंस कर सहुँ
तो सबको चैन है।
गर मैं किसी से कोई
शिकवा करूँ।
फिर क्यों ?
छीन जाता सबका चैन है।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
7.
वो इस तरह मुझे रिझाने लगे
की मरने के बाद जिंदगी बेहतर होगी।
प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)
प्रिय पाठकों आपके द्वारा हमारी काव्य रचनाओ को जो प्रेम और स्नेह मिल रहा है उसके लिये हम आपके दिल से शुक्रगुजार है। आशा है कि आप यूँ ही अपना स्नेह हमसे बनाये रखेंगे।

बहुत ही शानदार ह्रदयस्पर्शी अभिव्यक्ति ......👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌
ReplyDelete👍👍👌👌
ReplyDeleteबिल्कुल सत्य बात कही है गुरुजी आपने ����
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