इतना न परख ए ज़िन्दगी

Pramod Kumar Saini
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Itana Na Parakh Zindgi

इतना न परख ए ज़िन्दगी

नमस्कार दोस्तों ! हमारे इस ब्लॉग Itana Na Parakh Zindgi इतना न परख ए ज़िन्दगी में हम लेकर आये है इन काव्य रचनाओं को -

1 . इतना न परख ए ज़िन्दगी

2 . कहाँ  गये वो लोग ?

3 . क्यों भुला दिया उन कंधो को ?

4 . फिर दहन रावण का ही क्यों ?

5 . तू तेरी तक़दीर खुद लिखवायेगा 

 



1.
इतना न परख 
ए जिंदगी मुझे
मैं हर मोड़ पर 
याद आऊंगा तुझे
तेरा हर इम्तिहान 
मैं लड़ जाऊंगा
तुम्हे तेरे ही 
फलसफों से हराऊंगा।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)





2.
कँहा गये वो लोग
जिनके बिना हर रौनक फिकी-फिकी सी लगती है।
कँहा गये वो लोग
जिनके बिना हर महफ़िल सुनी-सुनी सी लगती है।
कँहा गये वो लोग
जिनके बिना हर चिलमन अधूरी-अधूरी सी लगती है।
कँहा गये वो लोग
जिनके बिना हर मोहलत मजबूरी सी लगती है।
कँहा गये वो लोग
जिनके बिना हर सांस पराई-पराई सी लगती है।
कँहा गये वो लोग
जिनके बिना हर रश्म हरजाई सी लगती है।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)





3.
छूकर आसमान तुमने उन कंधों को भुला दिया।
जिन्होंने तेरा हर बोझ हंस कर सहा था।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)



4.
रावण दहन करने से पहले सोचे।

हर इक ऐब है मुझमें
फिर दहन रावण का क्यों?
हर एक लत, व्यसन है मुझमें
फिर दहन रावण का क्यों?

उसने पर स्त्री पर नजर डाली,
क्या मैंने भी कभी अपनी नजर सम्भाली।

उसने अपनी भाई-बंधुओ की न मानी,
क्या मैंने भी कभी अपनों की कदर जानी।

उसने की अपनी मनमानी,
मैंने भी अपनी ही जिद ठानी।

दशहरा दहन करें।
पर अपनी भी बुराइयों का दहन करें।
धन्यवाद।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)





5.
अगर है हौसलों में दम,
तो न कर आँखे नम 'प्रेम'।
एक दिन तेरा वक्त भी आयेगा,
तू तेरी तक़दीर खुद लिखवाएगा।।

प्रमोद कुमार सैनी 
(प्रेम)


पाठकों मेरी रचनाओं को इतना प्यार और स्नेह देने के लिये, धन्यवाद । इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।

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