बचपन तो है कमाल

Pramod Kumar Saini
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बचपन तो है कमाल 

नमस्कार दोस्तों!!!
मेरा यह आर्टिकल 'ग़रज़ और ग़रूर' आपको बतायेगा की ज़िंदगी  क्या होती है? इसकी सच्चाई क्या  है? इस आर्टिकल में मैंने निम्न रचनाओं को  भी सम्मिलित किया है-
1. बचपन तो है कमाल
2. क़ीमत लेखनी की
3. ग़रज़ और ग़रूर
4. अलीमो के अल्फाज़ बोलते है
5. ज़िल्लत की ज़िंदगी
6. थोड़ी सी नज़र इनायत कर


Mandawa


बचपन तो है कमाल

1.
तू न बिकता बाजारों में
तू न जलता अंगारों में
तू है तो जिंदगी हसीन है
तू चला जाये तो मलाल
गर बस मेरा चले 
तो जीवनभर रखलू तुम्हे सम्भाल
बचपन तो है कमाल

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

क़ीमत लेखनी की

2.
क़ाबिल को क़ाबू करले ऐसा कोई क़फ़स नहीं।
क़ीमत लेखनी की अदा कर दे ऐसा कोई शक्स नहीं।।
जरा दिल में अपने झांककर तो देख कानून के रखवाले।
खुर्शीद को पकड़ना तो छोड़ छुना तक किसी के वश में नहीं।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कठिन शब्दार्थ

क़ाबिल-योग्य
क़ाबू-पकड़ना
क़फ़स-पिंजरा,जाल
खुर्शीद-सूर्य

ग़रज़ और ग़रूर

3.
उबाल उस्ताद को भी उरियां बना देता है।
ग़रज़ और ग़रूर इंसां को ग़लीज़ बना देता है।।
ज़िक्र न कर अपनी ज़िक़ का ज़हीर।
दानिश नाचीज़ को भी फ़रिश्ता बना देता है।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कठिन शब्दार्थ

उबाल-गुस्सा
उस्ताद-गुरु, श्रेष्ठ
उरिया-नग्न, खाली, शून्य
ग़रज़-लालसा, खुदगर्ज़ी
ग़रूर-गर्व
ग़लीज़-गन्दा, असभ्य
ज़िक्र-बतलाना
ज़िक-शोक, संताप
ज़हीर-मित्र
दानिश-ज्ञान
नाचीज-तुच्छ

Mandawa

अलीमो के अल्फाज़ बोलते है

4.
अलीमो के अल्फाज़ बोलते है
अव्वल वो है जिसके जज्बात बोलते है
असद को असीर बनना पसन्द नही
आक़िल के तो आगाज़ बोलते है

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कठिन शब्दार्थ

अलीम-बुद्धिमान
अल्फाज-शब्द
अव्वल-श्रेष्ठ
असद-शेर
असीर-कैदी
आक़िल-बुद्धिमान

Mandawa

ज़िल्लत की ज़िंदगी

5.
जिक्र मेरे जौक का जुबा जुबा पर है।
ज़िल्लत की ज़िंदगी जीना भी क्या जीना है।।
ज़ालिम, ज़लील का ज़ुल्म भी जग ज़ाहिर होगा सब्र रख।
ज़हीर तेरा ज़ेहन भी ज़ाहिर होगा जाबित तू कितना भी परख।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कठिन शब्दार्थ

जौक=रुचि
ज़हीर=मित्र, साथी
ज़ेहन=बुद्धि, कौशल
ज़ाहिर=स्प्ष्ट, प्रत्यक्ष
जाबित=स्वामी, मालिक

थोड़ी सी नज़र इनायत कर

6.
आब-ए-चश्म का दरिया बह उठा खिदमत तेरी देखकर।।
खता क्या है मेरी मोला, क्यों जग पड़ा पीछे मेरे खंजर लेकर।।
गुमां नहीं तनिक भी मुझे तेरी तासीर पर।
पर थोड़ी सी नज़र इनायत कर इस नाचीज़ पर।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कठिन शब्दार्थ
1. आब-ए-चश्म=आँसू
2. दरिया=नदी
3. खिदमत=सेवा
4. खता=गलती
5. मोला=खुदा
6. खंजर=चाकू/छुरी
7. गुमां/गुमान=सन्देह
8. तनिक=थोड़ा सा
9. तासीर=प्रभाव
10. इनायत=कृपा


पाठकों मेरी रचनाओं को इतना प्यार और स्नेह देने के लिये, धन्यवाद । इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।

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