सफलता का जुनून

Pramod Kumar Saini
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सफलता का जुनून

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सफलता का जुनून

सफलता और असफलता एक ही सिक्के केे दो पहलू है। सफलता का कोई सीधाा मार्ग नहीं होता है। सफलता हमसे कई प्रकार के त्याग चाहती है। सफलता का जुनून होना बहुत ही जरूरी है। 
असफलता हमारे द्वारा सफलता के मार्ग में की गई एक चूक होती है। कई बार असफलता में ही बहुत बड़ी सफलता छुपी होती है। बस जरूरत है हमें उसे पहचानने की। जो लोग अपनी असफलता के कारण को पहचान जाते हैं वह जिंदगी में आगे बढ़ जाते हैं। 
अतः हमें हमारे प्रयास तब तक नहीं रोकने चाहिए जब तक कि हमें सफलता नहीं मिल जाती है। चाहे इसके लिए कितना भी समय क्यों न लग जाए हमें अपने प्रयास निरंतर बनाए रखने चाहिए।


दिल में दिमाग हो 

1.
जो साथ रहकर भी साथ न दे।
ऐसे लोगों को अपने दिल की बात न दे।।
जिनकी वफ़ा में भी बेवफ़ाई हो।
उनसे हर हिसाब पाई पाई हो।।
जिनके दिल में भी दिमाग हो।
बच कर रहना उनसे, 
चाहे कितना ही गहरा क्यों न राग हो।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कुछ लोग है वो केवल पैसों की भाषा को समझते हैं। उनके लिए दिल और जज्बात की कोई कद्र नहीं होती है। ऐसे लोग समाज में हर जगह मिल जाते हैं। अतः हमें भी हमारे जो मित्र हैं उनकी एक बार जांच परख कर लेनी चाहिए। स्वार्थी मित्र है वह आपके साथ होते हुए भी आपका साथ नहीं देता है। वह केवल साथ होने का दिखावा करता है। समय रहते ही हमें ऐसे मित्रों को पहचान लेना चाहिए। हमें उनसे दूरी बनाकर रहना चाहिए।

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ज़िद  करो और दुनिया बदलो 

2.
गर तू मेरे विश्वास को बकवास
और मेरे उसूल को मेरी जिद
समझ रहा है।
गर तू मेरी असफलता को
अपनी सफलता और मेरी
जिद को मेरी हार समझ रहा है
तो याद रख!
वक्त तुम्हे भी रंग दिखलायेगा
जब तेरा कुत्ता तुम्हे ही खायेगा
तो तू किधर जायेगा।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

कई बार हम सही होते हुए भी दूसरों को बता नहीं सकते कि हम किस प्रकार से सही है। अगर हम अपने उसूलों पर चल रहे हैं तो हो सकता है कि हमें तुरंत सफलता ना मिले। इस दौरान हमारे अपने भी हम पर शक करने लग जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में कभी भी निराशा को अपने पर हावी नहीं होने दें। अगर आप और आपके उसूल सही हैं तो आपको दुनिया की कोई परवाह नहीं करनी है। बस आपको अपने मार्ग पर चलते जाना है। हो सकता है आपको दुनिया रूपी भौतिक सफलता न मिले लेकिन आपका जीवन है वह एक श्रेष्ठ जीवन होगा।

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ज़मीर बेचकर भी जीना क्या जीना है 

3.
ज़मीर बेचकर वो जीते है
जिनके कर्म खोटे हो
रोज मर मर के वो जीते है
जिनमें खुद में टोटे हो
बस एक बार खुद को पहचानों
अरे ओ सोई हुई आत्मा वालों

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

इंसान को कभी भी अपने जमीर के साथ सौदा नहीं करना चाहिए। जो इंसान अपने जमीर को बेचकर जिंदा रहता है उसे अपने स्वयं की योग्यता पर शक होता है।
हमें उस स्थान पर कभी भी नहीं रुकना चाहिए जहां पर हमारा सम्मान नहीं होता है। जैसा कि हम जानते हैं गिरवी ली हुई रकम कुछ समय तक ही चलती है और उसका हम सही सही प्रयोग भी नहीं कर सकते हैं ना ही हम उसका सुख उठा सकते हैं। हमारी स्वयं की मेहनत के द्वारा अर्जित राशि हमें सुकून देती है वह हमें आगे बढ़ने में मदद करती है और वह राशि हमें मानसिक संतुष्टि देती है। अतः खुद को पहचाने और खुद के कुछ सिद्धांत बनाएं और उन सिद्धांतों के अनुसार जीना सीखें। क्योंकि भगवान ने आपको भी वह सब कुछ दिया है जो अन्य सभी को दिया है। आप भी वह सब कुछ हासिल करने के योग्य हैं जो किसी भी एक सफल व्यक्ति ने जीवन में हासिल किये है। जिंदगी में हर वह चीज हासिल की जा सकती है जो इंसान के हासिल करने के लिए बनी हुई है।।

पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं सफलता का जुनून, दिल में दिमाग हो, ज़िद  करो और दुनिया बदलो और ज़मीर बेचकर भी जीना क्या जीना है  पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हम से जुड़े रहे।
धन्यवाद।।

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