माँ : कुदरत की अनूठी देन

Pramod Kumar Saini
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माँ: कुदरत की अनूठी देन

Ma-Kudarat-Ki-Anuthi-Den

दोस्तों कुदरत ने हमें बहुत अनूठी-अनूठी सौगातें दी है। उन सब सौगातों में माँ कुदरत की सबसे अनूठी देन है।  माँ के बारे में जितना कहा जाये उतना कम है। आज तक मां के बारे में बहुत लिखा जा चुका है और कहा जा चुका है।
पर मां के सामने हर कविता और हर लेख अधूरा है क्योंकि मां ईश्वर की इनायत है। मां खुदा तो नहीं लेकिन मां खुदा से कम भी नहीं। मां की महिमा को समेटने का मेरा भी यह एक प्रयास है।

मां तू खुदा की इनायत है, पर ख़ुदा से कम नहीं

1.
गर जन्नत है कंही तो तेरी बांहे है।
दर्द मेरा, नम तेरी निगाहें है।।

मैं क्यों ढूँढू दरिया-ए-आफताब।
गर है कंही कोई जन्नत तो तेरी बाँहे है।।

तेरे लिए दो जंहा की खुशियां खो दू तो गम नहीं।
मां तू खुदा की इनायत है, पर ख़ुदा से कम नहीं।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Jine-Ki-Aas-Hai-Betiyan

वर्षों से बेटों को ही समाज या परिवार में मान सम्मान मिलता रहा है । बेटियों को हमेशा से ही परिवार पर या पिता पर एक बोझ के रूप में देखा गया है। जबकि बेटियां एक परिवार को वास्तव में एक परिवार बनाती है। जब किसी घर में एक बेटी का जन्म होता है तो आज भी परिवार शोक में डूब जाता है । जबकि जबकि बेटियां बेटों से किसी भी प्रकार से कम नहीं है। हमें बेटियों को भी बेटों के सामान समझना चाहिए। हम सोचते हैं की बेटा बुढ़ापे का सहारा बन सकता है लेकिन बेटियां भी बुढ़ापे में बेटो से ज्यादा अपने माता पिता की सेवा करने को तत्पर रहती है।

जीने की आस है बेटियां


2.
जीने की आस है बेटियां,
जिंदगी का एहसास है बेटियां।
गर बेटे कुलदीपक है तो क्या हुआ,
दिलों के बहुत पास है बेटियां।
खुशी में सब अपने बनते है,
गम में पास आती है बेटियां।
क्यों कहते हो इन्हें पराया धन,
अमृत धन बरसाती है बेटियां।
कहते हो बेटों को बुढ़ापे का सहारा,
बुढ़ापे में याद आती है बेटियां।
क्यों कहते हो इन्हें नकारा,
घर को घर बनाती है बेटियां।
वो नसीब वाला है जिसके घर आती है बेटियां।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

The-Founder-of-Aazad-Hind-Foj
सुभाष चंद्र बोस

3.
देकर जां अपनी ख़ुदारी सीखाई,
वतन की ख़ातिर आजद हिन्द फ़ौज बनाई।
वतन के नाम का जिसने पूरी दुनिया में कर दिया जय घोष,
तेरी जय हो जय हो सुभाष चंद्र बोस।।

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

Indian-Army
जय भारतीय सेना

4.
झेली थी जो गोलियां 
वो सीना फौलादी था।
भारत माँ का हर एक सपूत
वतन पर मर मिटने को उन्मादी था।।
किसी की रोटी छीनना हमारी आदत न थी।
जब आन पर आई तो 
सारी दुनिया ने देखी हमारी हस्ती थी।।
दुश्मन चाहे जैसा हो दांतो चने चबवा देंगे।
वतन की मिट्टी की आन में
सो जाने गवां देंगे।।

जय हिंद
जय जवान
जय भारतीय सेना

प्रमोद कुमार सैनी
(प्रेम)

पाठकों मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी रचनाएं माँ: कुदरत की अनूठी देनमां तू खुदा की इनायत है, पर ख़ुदा से कम नहींजीने की आस है बेटियां, सुभाष चंद्र बोस और जय भारतीय सेना पसंद आई होगी। इसी प्रकार की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप हमसे जुड़े रहिये।
धन्यवाद।।

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